उत्तराखंड की अर्चना बिष्ट: कभी मैथ्स में मिले थे सिर्फ 11 नंबर, अब ISRO में हुआ चयन

Pauri Garhwal के Hilogi village की बेटी Archana Bisht का ISRO में चयन हुआ है। एक वक्त था जब अर्चना गणित में 100 में से सिर्फ 11 नंबर ही पा सकी थीं
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archana bisht isro: Archana Bisht of Pauri Garhwal selected in ISRO
Image: Archana Bisht of Pauri Garhwal selected in ISRO

पौड़ी गढ़वाल: मन में मजबूत इच्छाशक्ति हो तो चुनौतियों को भी अवसर में बदला जा सकता है। अब पौडी गढ़वाल के हिलोगी गांव की अर्चना बिष्ट को ही देख लें, जो अब इसरो में साइंटिस्ट के तौर पर सेवाएं देंगी।

Archana Bisht of Pauri Garhwal selected in ISRO

जिस कोरोना काल और लॉकडाउन को ज्यादातर लोग अपना बुरा सपना कहते हैं, वही लॉकडाउन अर्चना के लिए वरदान साबित हुआ। इन 2 सालों में अर्चना ने खूब मेहनत कर के अपने सपने को सच कर दिखाया। मूल रूप से पौड़ी गढ़वाल की रहने वाली अर्चना बिष्ट का परिवार गाजियाबाद में रहता है। अर्चना कहती हैं कि अगर लॉकडाउन का गैप नहीं आता तो शायद वह इतनी बड़ी सफलता हासिल नहीं कर पातीं। इसरो में सेलेक्ट हुई साइंटिस्ट अर्चना बिष्ट प्रताप विहार के एम ब्लॉक में रहती हैं। उनकी शुरुआती पढ़ाई ब्लूम पब्लिक स्कूल से हुई। हर क्लास में टॉप करने वाली अर्चना ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से मैथमेटिक्स ऑनर्स कंप्लीट किया है।

साल 2018 में उन्होंने बीएचयू से मैथ्स में मास्टर्स की डिग्री हासिल की। सीएसआईआर का एग्जाम क्लियर करने के बाद उन्होंने आईआईटी रुड़की से पीएचडी की। आज हम अर्चना की सफलता देख रहे हैं, लेकिन इसके पीछे उनका कड़ा परिश्रम छिपा है। एक वक्त था जब अर्चना गणित में 100 में से सिर्फ 11 नंबर लेकर आई थीं, लेकिन उन्होंने खुद को टूटने नहीं दिया। हार नहीं मानी। टीचरों ने भी उनका उत्साह बढ़ाया और अगले ही साल अर्चना ने 100 में से 100 नंबर लाकर अपने इरादे जाहिर कर दिए। साधारण परिवार में जन्मी अर्चना आज दूसरी बेटियों के लिए मिसाल बन गई हैं। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता और गुरुजनों को दिया। वह कहती हैं कि अगर मेहनत की जाए तो असंभव लक्ष्य को भी हासिल किया जा सकता है, हमें प्रयास करते रहना चाहिए।