शराब की दुकानें मतलब राजस्व। शराब की दुकानें न खुलने का सीधा नुकसान सरकार को हो रहा था, अधिकारी भी काम को लेकर गंभीर नहीं थे।
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कोमल नेगी
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Image: Salary of excise officers stopped in 5 districts of Uttarakhand
देहरादून: उत्तराखंड के पांच जिलों के आबकारी अधिकारियों की सैलरी रोक दी गई है। ये अधिकारी अपने जिलों में शराब और बीयर की दुकानें खुलवाने में फेल रहे। शराब की दुकानें मतलब राजस्व।
Salary of excise officers stopped in 5 districts
शराब की दुकानें न खुलने का सीधा नुकसान सरकार को हो रहा है। इसे देखते हुए आबकारी विभाग ने संबंधित अधिकारियों पर एक्शन लिया है। इनसे तीन दिन में स्पष्टीकरण देने को कहा गया है। बुधवार को आबकारी सचिव एचसी सेमवाल ने यह आदेश दिए। उत्तराखंड में देसी-विदेशी शराब की 622 दुकानें हैं। जारी वित्त वर्ष में सिर्फ 602 दुकानों का ही आवंटन हो पाया। 20 दुकानों की नीलामी के लिए जिला आबकारी अधिकारियों की ओर से गंभीर प्रयास नहीं किए गए। जो शराब की दुकानें नीलाम नहीं हो सकीं उनमें ऊधमसिंहनगर की जमौर, सितारगंज, कंजाबाग चौराहा, पतरामपुर ठाकुरपुर चुंगी, प्रतापपुर, हरियावाला, नादेही, गदरपुर व चक्की मोड़ शामिल हैं। आगे पढ़िए
अल्मोड़ा की भिकियासैंण, मैलेखाल, देघाट, स्याल्दे, सराईखेत, डोटियाल व मासी, पिथौरागढ़ की नंबर तीन, देहरादून की रानीपोखरी और नैनीताल स्थित बीयर की दुकान शामिल है। संबंधित अधिकारियों पर एक्शन लिए जाने से पहले बीती दो मई को आबकारी सचिव ने शराब की शेष दुकानों की लाटरी निकालने के लिए आबकारी अफसरों के साथ बैठक की थी। इस दौरान अफसरों से इस संबंध में प्रस्ताव मांगे गए थे, लेकिन किसी भी अफसर ने सचिव के निर्देश को तवज्जो नहीं दी। अब ऐसे 5 जिला आबकारी अधिकारियों का वेतन अग्रिम आदेश तक रोकने के निर्देश दिए गए हैं। जिन अधिकारियों की सैलरी रोकी गई है, उनमें देहरादून के जिला आबकारी अधिकारी राजीव चौहान, ऊधमसिंहनगर के हरीश कुमार, नैनीताल की रेखा जुयाल भट्ट, अल्मोड़ा के संजय कुमार और पिथौरागढ़ के गोविंद मेहता शामिल हैं।