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उत्तरकाशी: भारतीय संस्कृति विश्व की सबसे प्राचीन और समृद्ध संस्कृतियों में से एक है।
भारतीय संस्कृति आज भी अपने परंपरागत अस्तित्व के साथ अमर बनी हुई है। इस संस्कृति का जीवन-दर्शन ही कुछ ऐसा है कि भारत की सीमाओं से बाहर रहने वाले लोग भी भारतीय संस्कृति के प्रति आकर्षित होकर भारतीय परंपरा से विवाह के बंधन में बंध रहे हैं। भारतीय परंपरा विश्व में अपनी एक अलग पहचान बना रही है। और विदेश के कई लोग भारत में शादी कर चुके हैं। अब यमुनोत्री में पनामा के जोस और फिलिजाबेथ शादी के पवित्र बंधन में बंध गए। धाम के पूर्व व्यापार मंडल अध्यक्ष सतेंद्र सेमवाल ने बताया कि हर वर्ष यहां बड़ी संख्या में विदेशी जोड़े विवाह के बंधन में बंधते हैं। गंगोत्री धाम में शादी विवाह भगीरथ शिला के समीप संपन्न होती है। गंगोत्री धाम में विदेशी जोड़ा हिंदु रीति-रिवाजों के साथ विवाह बंधन में बंधा। धाम के तीर्थ पुरोहितों ने हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार वैदिक मंत्रों के साथ विदेशी जोड़े का विवाह संपन्न कराया।
हिंदू धर्म के अनुसार परंपरागत तरीके से विवाह के बंधन में बंधने वाले जोस और फिलिजाबेथ ने विवाह संस्कार संपन्न कराने वाले तीर्थ पुरोहित विपिन व पवन को बताया कि वे भारतीय हिंदू संस्कृति से बेहद प्रभावित हैं। उनको यहां की संस्कृति में अध्यात्म व सुकून मिलता है। इसलिए उन्होंने यहां आकर हिंदू रीति-रिवाजों के साथ शादी करने का निर्णय लिया। बीते मंगलवार को गंगोत्री धाम में पनामा निवासी जोस गोंजालेन व फिलिजाबेथ का विवाह संपन्न हुआ। इस दौरान यह सुखद पल देखने के लिए दूल्हा-दुल्हन के दोस्त भी मौजूद रहे। जोस गोंजालेन ने फिलिजाबेथ की मांग में सिंदूर भरा और जोस और फिलिजाबेथ ने सात फेरे लेकर एक-दूसरे को अपना जीवन साथी बनाया। गंगोत्री धाम के तीर्थ पुरोहित आचार्य विपिन सेमवाल व गंगा पुरोहित सभा के अध्यक्ष पवन सेमवाल ने विवाह संस्कार संपन्न कराया।