वर्ल्ड नो टोबैको डे पर 2022 उत्तराखंड के लिए तंबाकू सेवन करने वालों का आंकड़ा कम हुआ है जो कि लोगों के स्वास्थ्य के लिहाज से एक अच्छी खबर है।
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कोमल नेगी
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Image: Male female tobacco consumption figures in Uttarakhand
देहरादून: तंबाकू एक तरह का धीमा जहर है, जिसका सेवन स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक होता है और वह व्यक्ति को धीरे-धीरे मौत के मुंह में धकेलता जाता है। बावजूद इसके लोग बड़ी संख्या में तंबाकू उत्पाद का सेवन कर रहे हैं।
Uttarakhand Male female tobacco consumption figures
हालांकि, उत्तराखंड के लिए तंबाकू सेवन करने वालों का आंकड़ा कुछ राहत का संकेत दे रहा है। ग्लोबल एडल्ट टोबेको सर्वे 2016-17 के अनुसार राज्य में 43.5 प्रतिशत पुरुष और 9.3 प्रतिशत महिलाएं धूमपान व तंबाकू का सेवन करती थीं। यह संख्या अब कम हुई है। अब उत्तराखंड में 33.7 प्रतिशत पुरुष और 4.6 प्रतिशत महिलाएं धूमपान व तंबाकू का सेवन करती हैं। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत 'आओ गांव चलें, उत्तराखंड को तंबाकू मुक्त करें' अभियान की शुरुआत की गई है।
विश्व तंबाकू निषेध दिवस पर आज राज्यभर में पांच लाख से अधिक लोग तंबाकू मुक्त उत्तराखंड की शपथ लेंगे। तंबाकू खाने वाले व्यक्ति में मुहं, गले या फिर फेफड़ों का कैंसर होने की प्रबल संभावना रहती है। तंबाकू फेफड़े के कैंसर का कारण तो बन ही सकता है, साथ ही तंबाकू का सेवन करने वाले व्यक्ति को फेफड़े संबंधी अन्य रोग जैसे सीओपीडी, टीबी, निमोनिया आदि का जोखिम अधिक होता है।तंबाकू सेवन करने वाली महिलाओं में गर्भपात की दर सामान्य महिलाओं से तकरीबन 15 फीसदी अधिक होती है। तम्बाकू सेवन के कारण महिलाओं में फेफड़ों का कैंसर, दिल का दौरा, सांस की बीमारी, प्रजनन सम्बन्धी समस्याएं, माहवारी से जुड़ी समस्याएं ज्यादा होती हैं।