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ये ट्रेक्स गूगल मैप पर भी नहीं मिलेंगे! केदार हिमालय के छुपे हुए रास्ते
प्रकृति से जुड़ने और आत्मिक शांति पाने का अवसर। केदार हिमालय की वो यात्राएं जो ज़िंदगी भर याद रहती हैं।
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देहरादून: उत्तराखंड के वीर सपूत देश की सुरक्षा और सम्मान के लिए सदैव आगे रहते हैं। शायद यही वजह है कि उत्तराखंड के युवाओं का भारतीय सेना से सबसे खास संबंध है। और यही कारण है कि आइएमए से पासआउट होने वाला हर 12वां अधिकारी उत्तराखंड से नाता रखता है।
वहीं भारतीय सेना का हर पांचवां जवान भी इसी वीरभूमि में जन्मा है। अपने परिवार की सैन्य परंपरा को आगे बढ़ाते हुए उत्तराखंड के युवा लगातार देवभूमि का परचम लहरा रहे हैं। हाल ही में देहरादून के आईएमए में आयोजित एसीसी के दीक्षा समारोह में भी इस समृद्ध सैन्य विरासत की झलक साफ देखने को मिली। बंजारावाला निवासी विकास रावत ने पिता की ही तरह फौज में करियर चुना। विकास ने आर्मी स्कूल क्लेमेनटाउन से पढ़ाई की है। बचपन से ही वे सैन्य परिवार में पले बढ़े और उनके मन में सेना में जाने का जुनून बेहद कम उम्र से ही सवार रहा। और अब उन्होंने साबित कर दिया है कि अगर मन में कुछ पाने की तीव्र इच्छा हो तो कुछ भी नामुमकिन नहीं है।
दरअसल आर्मी कैडेट कॉलेज में प्रवेश भारतीय सेना के उन सैनिकों के लिए एक सुनहरा अवसर होता है जो एक नियमित सैनिक के रूप में सेना में शामिल हुए, लेकिन एक बड़े अधिकारी बनने के लिए जुनूनी हैं। बस इसी सपने को अपने मन में पालते हुए विकास रावत ने अपनी बारहवीं कक्षा खत्म की और इसके बाद सेना भर्ती के लिए होने वाली लिखित परीक्षा में उन्होंने देशभर में टाप किया। 2014 में वह गढ़वाल राइफल का हिस्सा बने और अब अफसर बनने की राह पर हैैं। उनके सामने भी कई मुश्किलें आईं मगर उन्होंने हिम्मत नहीं हारते हुए सभी मुश्किलों का डटकर सामना किया और अब नतीजा पूरी दुनिया के सामने है। उनकी इस उपलब्धि से उनके परिजनों के बीच में भी हर्षोल्लास का माहौल पसर गया है।