मौसम विभाग ने रविवार को राज्य के 3 जनपदों बागेश्वर, चमोली और पिथौरागढ़ में कहीं-कहीं भारी बारिश की संभावना जताई है। पढ़िए uttarakhand weather update 21 august
-
कोमल नेगी
-
Advertisement
Hidden Gem Treks of Kedar Himalaya You Must Explore Once in Life
Peaceful and untouched trekking routes away from the crowds. Hidden trails where nature still remains raw and pure.
Example Ads Media
Image: uttarakhand rain weather alert update 21 august
बागेश्वर: उत्तराखंड में एक बार फिर आपदा जैसे हालात बने हुए हैं। बीते दिन देहरादून, टिहरी और यमकेश्वर जैसे क्षेत्रों में बादल फटने की घटनाएं हुईं। अलग-अलग जगह हुए हादसों में कई लोगों की जान चली गई।
uttarakhand weather update 21 august
खेतों में मलबा जमा हो गया, जबकि कई ग्रामीणों के घर मलबे के ढेर में तब्दील हो गए। लोग बारिश रुकने का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन फिलहाल राहत मिलती नहीं दिख रही। मौसम विभाग ने रविवार को राज्य के 3 जनपदों बागेश्वर, चमोली और पिथौरागढ़ में कहीं-कहीं भारी बारिश की संभावना जताई है। इन जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है। पर्वतीय जनपदों में कहीं-कहीं तीव्र बौछार के साथ बारिश तथा मैदानी इलाकों में भी कहीं-कहीं हल्की से मध्यम बारिश की संभावना है। 22 और 23 अगस्त को प्रदेश में मौसम का मिजाज नर्म रहेगा, हालांकि 27 अगस्त तक बारिश का दौर जारी रहेगा। आगे पढ़िए
मौसम विभाग का कहना है कि भारी बारिश के चलते पर्वतीय इलाकों में भूस्खलन हो सकता है, मार्ग बाधित हो सकते हैं। निचले इलाकों में जलभराव से मुश्किलें बढ़ेंगी। इसलिए लोग सावधान रहें। नदी-नालों का जलस्तर बढ़ेगा। ऊंचाई वाले इलाकों में गर्जन के साथ आकाशीय बिजली गिरने की घटनाएं हो सकती हैं।
cloudburst in uttarakhand
बता दें कि शुक्रवार देर रात से शुरू हुई बारिश ने देहरादून, टिहरी और पौड़ी जिलों में जमकर कहर बरपाया। यहां भूस्खलन की वजह से मकान ढहने से मलबे में दबकर चार लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। इनमें एक पौड़ी के यमकेश्वर और तीन टिहरी के रहने वाले हैं। आपदा के बाद 13 लोग लापता हो गए, जबकि 12 घायलों को उपचार के लिए अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। भारी बारिश और भूस्खलन के कारण प्रदेश में 250 सड़कों पर आवाजाही ठप हो गई है। बंद सड़कों में 3 एनएच, 32 स्टेट हाईवे शामिल हैं। लगातार हो रही बारिश के चलते नदियां उफान पर आ गई हैं। नदियों का जलस्तर बढ़ने से खतरा बढ़ गया है।