अंकिता भंडारी मर्डर केस: बेहद अहम है गवाह नंबर 7, इसे अंकिता ने बताए रिसॉर्ट के सारे राज

गवाह नंबर 7 ने अंकिता को बचाने के लिए पुलकित से बात की थी, लेकिन पुलकित ने उसे जान से मारने की धमकी देकर चुप करा दिया।
Advertisement 90% ट्रेकर्स नहीं जानते केदार हिमालय के ये सीक्रेट रूट्स

प्रकृति से जुड़ने और आत्मिक शांति पाने का अवसर। केदार हिमालय की वो यात्राएं जो ज़िंदगी भर याद रहती हैं।

Example Ads Media
ankita bhandari case uttarakhand: Ankita Bhandari murder case witness number 7
Image: Ankita Bhandari murder case witness number 7

ऋषिकेश: देश को झकझोर कर रख देने वाले अंकिता भंडारी हत्याकांड में हर दिन नए खुलासे हो रहे हैं। इस केस में अंकिता का दोस्त पुष्प अहम गवाह है।

Ankita Bhandari murder case witness number 7

अंकिता ने वनंत्रा रिजॉर्ट में होने वाले काले कारनामों के बारे में पुष्प को बताया था, लेकिन पुष्प के अलावा कोई और शख्स भी है, जिसे इस केस का सबसे अहम गवाह माना जा सकता है। यह रिजॉर्ट का वही कर्मचारी है, जिसे अंकिता ने पुष्प से भी पहले रिजॉर्ट में हो रही गतिविधियों के बारे में बताया था। कर्मचारी ने इस बारे में पुलकित से बात भी की थी, लेकिन उसे डरा-धमकाकर चुप करा दिया गया। इस कर्मचारी की गवाही पुष्प से भी अहम मानी जा रही है। हत्याकांड के आरोपियों ने घटनास्थल पर हुई सारी कहानी पहले ही पुलिस को बता दी थी, लेकिन अंकिता की हत्या क्यों की गई, ये तब पता चला जब अंकिता और उसके दोस्त पुष्प की चैट सामने आई। अंकिता और पुष्प के बीच चैट से पता चला था कि अंकिता पर किसी वीआईपी को स्पेशल सर्विस दिए जाने का दबाव बनाया जा रहा था।

पुष्प से पहले अंकिता ने इस बारे में रिजॉर्ट के एक पुराने कर्मचारी को भी बताया था। इस कर्मचारी को उसने दो बार आमने-सामने और तीसरी बार मोबाइल पर पुलकित के कारनामों के बारे में बताया। आरोपी पुलकित अपने कर्मचारियों को धमका कर रखता था, फिर भी उक्त कर्मचारी ने किसी तरह पुलकित से बात करने की हिम्मत जुटाई, लेकिन पुलकित ने उसे जान से मारने की धमकी देकर चुप करा दिया। यही कर्मचारी अब पुलिस का गवाह नंबर सात है। अंकिता भंडारी हत्याकांड की जांच एसआईटी कर रही है। जांच टीम ने कुल 97 गवाहों में से सात गवाहों के मजिस्ट्रेटी बयान (सीआरपीसी 164) कराए हैं। इनमें वादी अंकिता के पिता के साथ-साथ पुष्प, रिजॉर्ट के कर्मचारी और गवाह नंबर सात शामिल हैं। एसआईटी ने 86 दिनों तक इस मामले में गंभीरता से विवेचना करने का दावा किया है।