उत्तराखंड: भीषण हादसे के बाद घर से उठी दोनों बेटियों की अर्थी, पिता ने कहा- अब कैसे जियूंगा?

अग्निकांड में अपनी बेटियों को खोने वाले विकेश के दर्द को शब्दों में नहीं बताया जा सकता। उनमें जीवन जीने की चाह खत्म हो चुकी है।
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Vikasnagar Fire Incident vikesh: Vikasnagar Tyuni Fire Incident Said Story of Vikesh Family
Image: Vikasnagar Tyuni Fire Incident Said Story of Vikesh Family

देहरादून: विकासनगर के त्यूनी में हुआ अग्निकांड तीन परिवारों को गहरा जख्म दे गया।

Vikasnagar Tyuni Fire Incident Said Story

गुरुवार को यहां सिलेंडर में धमाके के बाद लकड़ी के घर में आग लग गई। जिसमें चार मासूमों की जलकर मौत हो गई। परिजनों को अपनी मासूम बेटियों के शव तक नहीं मिले। आग का मंजर बेहद खौफनाक था। इस हादसे में खेतीबाड़ी करने वाले विकेश ने भी अपनी दो बेटियों को खो दिया। विकेश के दर्द को शब्दों में नहीं बताया जा सकता। उनमें जीवन जीने की चाह खत्म हो चुकी है। विकेश ने बिलखते हुए कहा कि मेरी दोनों बेटियां चली गईं, अब जीने की कोई वजह नहीं रही। आगे पढ़िए

विकेश की बेटी अधीरा 5 साल और सैजल ढाई साल की थी। दोनों बेटियों की पढ़ाई के लिए विकेश ने गूंडा गांव में किराये में कमरा लिया था। जहां दोनों बेटियां मां कुसुम के साथ रहती थीं। कुसुम दोनों बेटियों को लेकर अपनी बहन पूनम के यहां गई हुई थीं। जहां हादसा हुआ। पूनम की नौ वर्षीय पुत्री सोनम भी अग्निकांड का शिकार हो गईं। सोनम दिव्यांग थी। वह दो भाई बहनों में बड़ी थी। उसके पिता त्रिलोक ड्राइवर हैं। वहीं हादसे का शिकार हुई समृद्धि (9) उर्फ रिद्धी पढ़ाई के लिए त्यूनी में अपनी मौसी पूनम के यहां रह रही थी। वो चार दिन पहले ही अपने गांव से लौटी थी। त्यूनी अग्निकांड में तीन सगी बहनों ने अपने मासूम बच्चों को खो दिया। बेटियों को खोने के गम में तीनों के परिजन गहरे सदमे में हैं। हर किसी का रो-रोकर बुरा हाल है।