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90% ट्रेकर्स नहीं जानते केदार हिमालय के ये सीक्रेट रूट्स
प्रकृति से जुड़ने और आत्मिक शांति पाने का अवसर। केदार हिमालय की वो यात्राएं जो ज़िंदगी भर याद रहती हैं।
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चमोली: हर वर्ष लोग बरसात के आने का इंतजार करते हैं, मगर पहाड़ों पर बरसात आते ही वहां की हालत दयनीय हो जाती है।
जगह जगह तबाही के मंजर नज़र आते हैं और यह इक्का-दुक्का जगह की बात नहीं है, बल्कि उत्तराखंड के लगभग सभी पहाड़ी जिलों में ऐसे ही हालात उत्पन्न हो रहे हैं। बरसात में चमोली में भी त्राहि-त्राहि मच गई है। चमोली के स्यूण गांव के मज्जू ग्वाड़ में बादल फटने से भारी नुकसान हुआ है। यहां सैकड़ों नाली भूमि पर नकदी धान की फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई है। इसी के साथ ही गौशाला को भी नुकसान पहुंचा है। लुदांऊ गदेरे पर बना लकड़ी का पुल भी ध्वस्त हो गया है जिस वजह से गांव का संपर्क मार्ग से कनेक्शन टूट गया है। दरअसल दशोली ब्लाक के स्यूण गांव के मज्जू ग्वाड़ में बीते शनिवार रात बादल फटने से ग्रामीणों की 100 नाली जमीन पर धान की पूरी फसल बर्बाद हो गई है। आगे पढ़िए
साथ ही मलवा से दो गौशालाओं को भी नुकसान पहुंचा है। वहीं भारी बारिश होने से लुदांऊ गदेरे पर बना अस्थाई लकड़ी का पुल भी बह गया है, जिससे लुदांऊ और स्यूंण गांव की आवाजाही पूरी तरह बंद हो गई है। वहीं गांव के 150 परिवारों की आवाजाही बंद हो गई है। संपर्क मार्ग से कनेक्शन कट हो जाने के कारण लोग कहीं आवाजाही नहीं कर पा रहे हैं। गदेरे पर भी उफ़ान आ रखा है जिसको पार करना खतरे से खाली नहीं है। वहीं बरसात से खाद्य सामग्रियों को भी भारी नुकसान हुआ है। मज्जू ग्वाड़ में बादल फटने से 15 परिवारों की लगभग 100 नाली जमीन पर नगदी धान की फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई है। ग्रामीणों ने शासन - प्रशासन को मौके का निरीक्षण कर प्रभावितों को खेती व नकदी फसल का (chamoli Syoon village cloudburst) मुआवजा दिए जाने की मांग करने के साथ ही लुदांऊ गदेरे में लकड़ी के अस्थाई पुल की मांग भी की है। मौसम की बात करें तो आने वाले कुछ दिन तो बरसात से राहत नहीं मिलेगी। मौसम विभाग ने मूसलाधार बरसात का अलर्ट जारी कर दिया है।