उत्तराखंड: जिंदा मरीज को अस्पताल ने रजिस्टर में मुर्दा दिखा दिया, हैरान रह गए घर वाले

एसटीएच में भर्ती जीवित मरीज को स्टाफ ने रजिस्टर में मृत दर्ज कर दिया। उसके परिजन पहुंचे तो उनको पता लगा कि उनके उनका देहांत हो गया है।
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Uttarakhand dead patient alive: Alive patient declared dead in Haldwani STH
Image: Alive patient declared dead in Haldwani STH

हल्द्वानी: सरकारी अस्पताल की उत्पत्ति ही लापरवाही के लिए हुई है? जब तक कि अस्पताल में एक दो लापरवाही न हो जाए तब तक यह साबित कैसे होगा कि वे सरकारी अस्पताल के हैं।अब सुशीला तिवारी अस्पताल का उदाहरण ले लीजिए।

Alive patient declared dead in Haldwani STH

यहां एसटीएच में भर्ती जीवित मरीज को स्टाफ ने रजिस्टर में मृत दर्ज कर दिया। उसके परिजन पहुंचे तो उनको पता लगा कि उनके उनका देहांत हो गया है। जब उनके परिजनों को इसकी जानकारी मिली तो उनके पांव के नीचे जमीन खिसक गई। अब इसमें अस्पताल वालों की लापरवाही सामने आई है।एक तरफ नवीन के भर्ती होने की प्रक्रिया चल रही थी तो एक तरफ मृत व्यक्ति का डेथ सार्टिफिकेट बन रहा था। इसी भर्ती डिस्चार्ज की प्रक्रिया में नवीन का नाम मृत व्यक्ति के रूप में दर्ज हो गया। दरअसल तीन सितंबर को लामाचौड़ निवासी पंकज कुमार अपने पिता नवीन चंद्र को इलाज के लिए एसटीएच लेकर आए थे। उन्हें सांस लेने में काफ़ी दिक्कत हो रही थी। उनकी जांच के बाद डॉक्टर ने उन्हें भर्ती होने की सलाह दी। उन्हें वार्ड डी में भर्ती कर दिया गया। आगे पढ़िए

जब नवीन के बीमार होने की खबर उनके रिश्तेदारों को मिली तो वह हालचाल जानने के लिए एसटीएच पहुंचे। जब उनके रिश्तेदार वहां पहुंचे तो उन्होंने नवीन के बारे में पूछा। वहां मौजूद स्टाफ नर्स ने रजिस्टर में उन्हें मृत बता दिया। यह सुनकर उनके रिश्तेदारों के हाथ पांव फूल गए। बाद में उनको पता लगा की नवीन चन्द्र जीवित हैं, और हैरानी की बात यह है कि अस्पताल के रजिस्टर में देखा तो नवीन चंद्र के नाम के आगे शाम 3.45 बजे मृत लिखा हुआ था। जिससे सभी आक्रोशित हो गए। अब अस्पताल से यह लापरवाही किस तरह हुई यह भी जान लीजिए। दरअसल एसटीएच में इन दिनों काफी मरीज भर्ती और डिस्जार्ज हो रहे हैं, जिसके चलते जीवित को मृत बताने की गड़बड़ी हुई है। जांच में यह बात सामने आयी है कि जिस बेड में नवीन चन्द्र को भर्ती किया गया था, उस बेड में भर्ती मरीज की नवीन को भर्ती करने से कुछ देर पहले मौत हुई थी। एक तरफ नवीन के भर्ती होने की प्रक्रिया चल रही थी तो एक तरफ मृत व्यक्ति का डेथ सार्टिफिकेट बन रहा था। इसी भर्ती डिस्चार्ज की प्रक्रिया में नवीन का नाम मृत व्यक्ति के रूप में दर्ज हो गया। परिजनों ने अस्पताल पर कड़ी कार्यवाही की मांग की है।