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ये ट्रेक्स गूगल मैप पर भी नहीं मिलेंगे! केदार हिमालय के छुपे हुए रास्ते
प्रकृति से जुड़ने और आत्मिक शांति पाने का अवसर। केदार हिमालय की वो यात्राएं जो ज़िंदगी भर याद रहती हैं।
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हल्द्वानी: उत्तराखंड वन अनुसंधान संस्थान ने एक ऐसी प्रजाति के फूल की खोज की है, जो कि विलुप्त होने की कगार पर है।
जी हां ये उत्तराखंड वन अनुसंधान संस्थान के लिए गर्व की बात है। इस फूल का नाम है जेंटियाना कुरू। विलुप्त हो चुके इस फूल के पौधे को आमतौर पर हिमालयन जेंटियन के नाम से जाना जाता है। इस फूल की खास बात ये है कि ये कई बीमारियों के इलाज में भी काम आता है। ये फूल आम तौर पर सितंबर से अक्टूबर तक खिलता है। आगे पढ़िए इसके फायदे
ये मुख्य रूप से गढ़वाल हिमालय में 1700 से 2100 मीटर की ऊंचाई पर पाया जाता है। हिमालयन जेंटियन को पारंपरिक हर्बल चिकित्सा प्रणालियों, आयुर्वेद में बेहद इस्तेमाल किया जाता है। इसकी जड़ों का उपयोग कई बीमारियों के इलाज में होता है। जासे यकृत रोग, पाचन विकार, मधुमेह, ब्रोन्कियल अस्थमा और मूत्र संक्रमण के इलाज के लिए ये रामबाण है। इसकी जड़ें लीवर की बीमारियों के इलाज में बेहद कामयाब साबित होती हैं। अत्यधिक दोहन के कारण ये विलुप्त होने के कगार पर है। IUCN द्वारा इस फूल को गंभीर रूप से लुप्तप्राय फूल के रूप में वर्गीकृत किया गया है। अब उत्तराखंड वन अनुसंधान संस्थान ने इस फूल की खोज की है।