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हजारों वर्षों से जलती अखंड ज्योति के सामने सात फेरे - आस्था, परंपरा और प्रकृति का अनोखा संगम
पहाड़, मंत्र और देवभूमि का आशीर्वाद.. त्रियुगीनारायण में शादी सिर्फ एक समारोह नहीं, आध्यात्मिक अनुभव है।
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रुद्रप्रयाग: पहाड़ों में मानसून शुरू होते ही बारिश अपना कहर दिखाने लगी है। बारिश के कारण मंदाकिनी और अलकनंदा नदी का जलस्तर काफी बढ़ गया है। नदियां उफान मचाती हुई बह रही है। धीरे-धीरे नदी खतरे निशान तक पहुंच रही हैं।
तेज बारिश के कारण पहाड़ों में नदियों से सटे आवासीय भवनों को खतरा पैदा होने लगा है। बेलनी पुल के नीचे स्थित शिव की मूर्ति भी जलमग्न हो चुकी है। उफान पर बह रही बदरीनाथ से आने वाली अलकनंदा नदी अपने तेज बहाव के साथ कूड़ा कचरा और बड़े बड़े पेड़ बहकर आ रहे हैं।
बृहस्पतिवार रात को तेज बारिश के कारण केदारनाथ हाईवे के रुद्रप्रयाग अलकनंदा और मन्दाकिनी नदी के संगम स्थित 60 मीटर लम्बी सुरंग का ऊपरी हिस्सा ढह गया है। सुरंग के बीच में एक बड़ा छेद भी हो गया। सुरंग की ऊपर की पहाड़ी से मलबा और बोल्डर गिरने के कारण सुरंग में सुराख हो गया है। भारी मात्रा में मलबा सुरंग के भीतर आ गया है।
सुरंग बंद हो जाने के कारण फिलहाल इस रास्ते से केदारनाथ घाटी जाने वाले वाहनों की आवाजाही पर रोक लगा दी गई है। स्थानीय लोगों एवं तीर्थ यात्रियों को केदरघाटी जाने और केदारघाटी से वापस जाने के लिए 5 किमी की अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ेगी। जब तक सुरंग ठीक नहीं हो जाती तब तक केदारघाटी जाने वाले वाहन बाईपास मोटर मार्ग से होकर आवाजाही करेंगे।