उत्तराखंड के अधिकारियों का कारनामा: बिना किसी इनकम के भर दिया 100 करोड़ इनकम टैक्स

उत्तराखंड में अधिकारियों ने कमाल कर दिया है, मंत्रियों और अधिकरियों के होश उड़ गए हैं, अधिकारियों ने बिना इनकम के 100 करोड़ का इनकम टैक्स दिया गया है।
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Uttarakhand Forest Corporation: Forest Corporation fills wrong Income Tax of 100 Crore
Image: Forest Corporation fills wrong Income Tax of 100 Crore

देहरादून: उत्तराखंड वन विकास निगम ने दो साल पहले सौ करोड़ यानि एक अरब रुपये टैक्स में जमा करा दिये, जिन रुपयों पर ये टैक्स लगा है वो प्रदेश को कभी प्राप्त ही नहीं हुए। यह मामला तब उजागर हुआ जब विभागीय मंत्री समीक्षा बैठक कर रहे थे और मामले का पता चलते ही मंत्री चकित रह गए।

Forest Corporation fills wrong Income Tax of 100 Crore

उत्तर प्रदेश से उत्तराखंड वन विकास निगम को बंटवारे के समय 99 करोड़ रुपये की राशि मिलनी थी, लेकिन यूपी ने यह रकम अभी तक नहीं दी है। इस राशि पर ब्याज मिलाकर कुल रकम अब 563 करोड़ रुपये हो चुकी है। उत्तराखंड सरकार लंबे समय से इस धनराशि की प्राप्ति के लिए प्रयासरत है, लेकिन यूपी ने अब तक कोई भुगतान नहीं किया है। मंगलवार को पुनर्गठन मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल ने जब यूपी से मिलने वाली राशि की विभागवार समीक्षा की तो यह खुलासा हुआ कि वन विकास निगम ने यूपी से मिलने वाली रकम के बदले 100 करोड़ रुपये का आयकर भी जमा कर दिया है। बंटवारे के अनुसार उत्तराखंड को अभी तक यूपी से यह राशि मिली ही नहीं।

जो रकम मिली ही नहीं उसपर भर दिया 100 करोड़ टैक्स

जब इनकम टैक्स विभाग ने उत्तरप्रदेश वन विकास निगम से 560 करोड़ रुपये के एवज में 100 करोड़ रूपये टैक्स की मांग की, तो जवाब में यूपी ने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि यह राशि उत्तराखंड की है। फिर इनकम टैक्स विभाग ने टैक्स न देने पर उत्तराखंड वन विकास निगम का एसबीआई खाता सीज कर दिया, जिससे परेशान होकर निगम ने बिना ट्रिब्यूनल में गए एक अरब रुपये का टैक्स जमा कर दिया। यह मामला वित्त मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल के संज्ञान में आया, जिन्होंने पुनर्गठन विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान खुलासा किया। अब बड़ा सवाल यह है कि इस एक अरब रुपये के टैक्स की जिम्मेदारी किस पर तय की जाएगी और लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई होगी, खासकर जब इस राशि पर पिछले दो सालों में ब्याज करोड़ों में बढ़ चुका है। सरकार मामले के उजागर होने के बाद लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई करती है, साथ ही उत्तरप्रदेश से अपने 560 करोड़ रूपये लेने के लिए उत्तराखंड सरकार क्या करती है, ये देखने वाली बात होगी।