उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग ज़िले में सार्वजनिक जगहों पर कुछ बोर्ड लगाये गए हैं। इन बोर्डों पर 'चेतावनी' लिखी गई है। इन पर फेरी वालों रोहिंग्या मुसलमानों और ग़ैर हिन्दुओं के गांव में प्रतिबंध की बात लिखी है।
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राज्य समीक्षा डेस्क
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Image: Warning boards in many villages of Rudraprayag
रुद्रप्रयाग: लगातार हो रही अप्रिय घटनाओं से तंग आकर, उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में कई गांवों में 'चेतावनी' और 'सूचना' वाले बोर्ड लगाये गए हैं। जिले के कई कस्बों और गांवों में बाहरी लोगों द्वारा चोरी-चकारी और छेड़खानी की खबरों के कारण ये बोर्ड लगाये गए हैं।
Warning boards in many villages of Rudraprayag
रुद्रप्रयाग जिले के राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े अशोक सेमवाल का कहना है कि इन बोर्ड्स को जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से लगाया गया है। केदारघाटी में किसी ने ये मुहिम छेड़ी तो सभी एक दूसरे को देखकर बोर्ड लगा रहे हैं। अशोक कहते हैं कि ये जो बोर्ड लगाये गए हैं, वो गाँव के प्रधानों और कुछ संगठनों के द्वारा जागरूकता फैलाने के लिये लगाए गए हैं। ऐसे बोर्ड एक ही नहीं बल्कि कई गाँवों में लगाये गए हैं। जब बाज़ार में व्यापार किया जा सकता है तो गांव में आना क्यों ज़रूरी है?
स्थानीय लोगों ने बताया क्यों लगाये बोर्ड
स्थानीयों का कहना है कि चमोली जिले में छेड़छाड़ की घटना हो श्रीनगर गढ़वाल में सलून चलाने वाले व्यक्ति का वाकया, या उत्तरकाशी जिले में फेरी वालों की अक्सर होती वारदातें, यहां बच्चों और नाबालिगों से छेड़छाड़ करना इनके लिए आम बात हो गयी है। कई मामले पिछले दिनों सामने आये हैं। पहाड़ के अलग अलग स्थानों से बाहर रखे सामान जैसे होटल व्यवसाइयों के जनरेटर और गोवंश आदि को भी इनके द्वारा रात को उठा ले जाने की घटनाएं स्थानीय लोग बताते हैं।
पुलिस ने कराया बोर्ड में संशोधन
रुद्रप्रयाग पुलिस के हस्तक्षेप के बाद बोर्ड में संशोधन के लिए कहा गया है। पुलिस की तरफ़ से कहा गया कि बोर्ड पर किसी समुदाय विशेष ना नाम नहीं होना चाहिए। ये भी मशवरा दिया गया कि किसी समुदाय या मजहब के बारे में न लिखकर बोर्ड पर 'बाहरी' लिखा जाए। मामला उछला तो मुस्लिम प्रतिनिधिमंडलों ने उत्तराखंड के पुलिस महानिदेशक अभिनव कुमार से मुलाक़ात की और मामले की जानकारी दी। ये मामला ऐसे समय में सामने आया है जब रुद्रप्रयाग के पड़ोसी चमोली जिले में नाबालिग़ से छेड़छाड़ का मामले ने तूल पकड़ा है।