Uttarakhand News: 17 महीने की जेल के बाद उत्तराखंड में मनीष सिसोदिया, ज्ञान वृक्ष के नीचे लगाया ध्यान

काकड़ीघाट धाम में आध्यात्मिक यात्रा पर पहुंचे पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने राजनीतिक गतिविधियों से दूरी बनाते हुए कत्यूरकालीन महादेव और भैरव मंदिर में पूजा-अर्चना की।
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प्रकृति से जुड़ने और आत्मिक शांति पाने का अवसर। केदार हिमालय की वो यात्राएं जो ज़िंदगी भर याद रहती हैं।

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Manish Sisodia: Manish Sisodia Reached Kakrighat Dham on Spiritual Journey
Image: Manish Sisodia Reached Kakrighat Dham on Spiritual Journey

अल्मोड़ा: मनीष सिसोदिया ने स्वामी विवेकानंद की तपस्थली पर ध्यान भी लगाया, जो उनके लिए एक विशेष अनुभव था। उन्होंने कहा कि इस पवित्र भूमि पर ये जीवन भी कम पड़ जाएगा बिताने के लिए। उपमुख्यमंत्री रह चुके सिसोदिया हाल ही में भ्रष्टाचार के मामले में 17 महीने जेल में रहने के बाद रिहा हुए हैं।

Manish Sisodia Reached Kakrighat Dham on Spiritual Journey

राजनीती से दूर पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने काकड़ीघाट धाम में युग पुरुष की तपस्थली का दौरा किया। कत्यूरकालीन महादेव और भैरव मंदिर में उन्होंने श्रद्धा पूर्वक पूजा की। उन्होंने उस ज्ञानवृक्ष के पास जाकर ध्यान किया, जिसके नीचे स्वामी विवेकानंद ने ज्ञान की प्राप्ति की थी। सिसोदिया ने स्पष्ट किया कि वह अपनी आध्यात्मिक यात्रा में केवल अध्यात्म की गहराईयों का अनुभव कर रहे हैं, इसीलिए किसी भी राजनीतिक मुद्दे पर चर्चा नहीं करना चाहते। उन्होंने कहा कि इस पवित्र भूमि पर पूरा जीवन बिताना भी अपर्याप्त होगा।

राजनीतिक चर्चाओं से किया किनारा

पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया जो हाल ही में 17 महीने जेल में रहकर रिहा हुए हैं, उन्होंने रविवार को काकड़ीघाट में जीवनदायिनी कोसी और सिरौता के संगम पर अपनी आध्यात्मिक यात्रा शुरू की। यहां उन्होंने स्वामी विवेकानंद की तपस्थली का दौरा किया और बताया कि पर्वतीय वादियों में अध्यात्म का अनुभव उन्हें मानसिक शांति दे रहा है। सिसोदिया ने मौजूदा राजनीतिक स्थिति पर चर्चा करने से इनकार करते हुए कहा कि इस यात्रा का उद्देश्य केवल आध्यात्मिक अनुभव प्राप्त करना है।

सिसोदिया ने ज्ञान वृक्ष पर किया ध्यान

मनीष सिसोदिया ने विवेकानंद सेवा समिति के अध्यक्ष हरीश चंद्र सिंह परिहार के साथ ज्ञान वृक्ष पर गहन चर्चा की। परिहार ने उन्हें बताया कि युगपुरुष स्वामी विवेकानंद ने हिमालय पदयात्रा के दौरान उसी पीपल वृक्ष की छांव में ध्यान लगाकर ज्ञान प्राप्त किया था और वर्तमान पेड़ उसी वृक्ष का क्लोन हैं। सिसोदिया ने कोसी में मछलियों को दाना देने के बाद ध्यान केंद्र में भी समय बिताया और दोबारा काकड़ीघाट आने का आश्वासन दिया। इस अवसर पर समिति अध्यक्ष ने उन्हें ज्ञान वृक्ष का पुनरोत्थान पर एक पुस्तक भेंट की।