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ऋषियों का मार्ग: केदार हिमालय के इन ट्रेक्स पर शोर नहीं, सिर्फ मंत्र सुनाई देते हैं
प्रकृति से जुड़ने और आत्मिक शांति पाने का अवसर। केदार हिमालय की वो यात्राएं जो ज़िंदगी भर याद रहती हैं।
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देहरादून: देश के उद्योग जगत के सबसे नायाब ‘रतन’ यानी रतन टाटा अब नहीं रहे। भारत के सबसे बड़े बिजनेस टाइकून और टाटा संस के मानद चेयरमैन रतन टाटा का निधन हो गया।
रतन टाटा ने 86 साल की उम्र में अपनी अंतिम सांस ली। उनको मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में गंभीर हालत में ICU में भर्ती कराया गया था। बुधवार 9 अक्टूबर देर रात को ब्रीच कैंडी अस्पताल के ICU में उन्होंने अपनी अंतिम सांस ली।
पिछले कुछ समय से उनकी तबीयत खराब थी। सोमवार को उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बुधवार को उनकी तबीयत ज्यादा बिगड़ने की खबर आई थी, और देर रात उनकी निधन की खबर आई। रतन टाटा के निधन का समाचार मिलते ही रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी भी ब्रीच कैंडी अस्पताल में पहुंचे।
अपनी सादगी और सरल स्वभाव और नेक कामों के लिए पहचाने जाने वाले रतन टाटा करोड़ो भारतियों के दिलों में हमेशा जिन्दा रहेंगे। उदारीकरण के दौर के बाद टाटा समूह आज जिस ऊंचाइयों पर है, उसे यहां तक पहुंचाने में रतन टाटा बहुत बड़ा योगदान है। टाटा का जन्म 28 दिसंबर, 1937 को हुआ और मृत्यु 9 अक्टूबर 2024 को हुई। वे टाटा समूह के संस्थापक जमशेदजी टाटा के दत्तक पोते नवल टाटा के पुत्र थे। रतन टाटा को राष्ट्र निर्माण में उल्लेखनीय योगदान के लिए साल 2008 में देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान- पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था।