देहरादून: क्रिप्टो फ्रॉड सरगना के घर ED ने मारी रेड, मिले 16.81 करोड़ की धोखाधड़ी के अहम सबूत

नरेश गुलिया का घोटाला इमोलिएंट कॉइन के नाम से जाना जाता है। इसके तहत गुलिया ने "द इमोलिएंट कॉइन लिमिटेड" नामक कंपनी स्थापित की और एक एप विकसित कर लोगों को क्रिप्टो में निवेश करने का प्रलोभन देकर 10 महीनों में धन दोगुना करने का दावा किया।
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crypto fraud mastermind: ED raids crypto fraud mastermind house in Dehradun
Image: ED raids crypto fraud mastermind house in Dehradun

देहरादून: देहरादून ईडी टीम ने क्रिप्टो धोखाधड़ी के मुख्य आरोपी नरेश गुलिया निवास पर छापेमारी की। हालांकि, इस छापेमारी के दौरान ईडी टीम नरेश गुलिया को गिरफ्तार नहीं कर सकी। फिर भी, उनके आवास से क्रिप्टो धोखाधड़ी और उससे जुड़ी आय के कई महत्वपूर्ण सबूत मिले हैं। इसके साथ ही, छापे मारी में गुलिया के कुछ बैंक खातों की भी जानकारी मिली है।

ED raids crypto fraud mastermind house in Dehradun

नरेश गुलिया का के सहस्रधारा रोड पर स्थित पनाष वैली के निकट का निवास स्थान लगभग 400 गज क्षेत्र में स्थित है। ED ने इसकी बिक्री पर रोक लगाने के लिए सब रजिस्ट्रार को एक पत्र भेजा है। इसके बाद, भवन और संपत्ति को अटैच करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। ED टीम ने गुलिया के लगभग डेढ़ करोड़ रुपयों के बैंक खातों को भी फ्रीज कर दिया है। ईडी टीम इस मामले में लगातार जांच में जुटी है और कब्जे में लिए गए दस्तावेजों के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

इमोलिएंट कॉइन घोटाला

ईडी अधिकारियों ने बताया कि नरेश गुलिया का घोटाला इमोलिएंट कॉइन के नाम से जाना जाता है। इसके तहत गुलिया ने "द इमोलिएंट कॉइन लिमिटेड" नामक कंपनी स्थापित की और एक एप विकसित कर लोगों को क्रिप्टो में निवेश करने का प्रलोभन देकर 10 महीनों में धन दोगुना करने का दावा किया। इस एप के द्वारा गुलिया ने कई लोगों के साथ धोखाधड़ी की है, जिनमें से मुख्यत लद्दाख, जम्मू कश्मीर और हरियाणा के लोग शामिल हैं। नरेश गुलिया ने निवेश का झांसा देकर लोगों से 16.81 करोड़ से अधिक रूपये ठगे हैं।

ऐसे किया था फ्रॉड

ईडी अधिकारियों ने बताया कि नरेश गुलिया ने क्रिप्टो धोखाधड़ी को अंजाम देने के लिए इमोलिएंट कॉइन और टेक कॉइन लिमिटेड नाम की कम्पनियों की रजिस्टरी कराई थी। दोनों कंपनियों को 90 पाल स्ट्रीट, ओल्ड स्ट्रीट शोरेडीच, लंदन (यूके) में पंजीकृत किया गया था। जिन निवेशकों ने उसकी एप में पैसे निवेश किए थे। उनका लॉकइन पीरियड सितंबर 2019 में समाप्त हो रहा था। लेकिन नरेश ने उससे पहले ही जानबूझकर नकली सिक्कों का मूल्य घटा दिया। इसके बाद, अक्टूबर-नवंबर में एप ने काम करना बंद कर दिया और 12 जनवरी 2021 से कंपनी का संचालन भी रोक दिया गया।

मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट में मामला दर्ज

लद्दाख पुलिस ने 2020 में इस मामले में गुलिया के साथियों (लेह निवासी अतीउल रहमान मीर और जम्मू निवासी अजय कुमार चौधरी) के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। इन आधारों पर ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत मामला दर्ज कर इसकी जांच शुरू की। ईडी टीम ने हरियाणा, नई दिल्ली और जम्मू में भी इस मामले में जांच की। इस जांच के दौरान आरोपियों की करीब 06 करोड़ की संपत्ति जब्त की गई है। ईडी टीम ने अगस्त 2024 में भी फर्जी क्रिप्टो करेंसी का संचालन करने वालों के ठिकानों पर छापे मारी की थी। उस दौरान ईडी ने 01 करोड़ रुपये की नकदी जब्त की थी।