इस सड़कमार्ग पर पुल ना बनने से दर्जनों गांव सड़क मार्ग से वंचित है जबकि आधी से अधिक सड़क डामरीकृत हो चुकी है। जनता मांग करते करते थक चुकी है, लेकिन सरकार बहाने बनाते और नजर अंदाज करते हुए नहीं थक रही है।
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राज्य समीक्षा डेस्क
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Untouched Trekking Routes in Kedar Himalaya, Uttarakhand
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Image: Villagers waiting for Jawadirola bridge 19 years
देहरादून: रौंदेड़ी पुनोडी चिल्लाऊं सड़क मार्ग पर जवाडीरोला पुल निर्माण का स्थानीय लोग करीब डेढ़ दशक से इन्तजार कर रहे हैं। स्थानीय विधायक ने चुनाव के दौरान इस निर्माणाधीन पुल का लेकिन उद्घाटन किया था, लेकिन तब से अब तक पुल निर्माण के नाम पर दो पीलर खड़े कर के रखे हैं। इस सड़क मार्ग पर पुल का निर्माण न होने के कारण दर्जनों गांव सड़क मार्ग से वंचित हैं, और आधी से अधिक सड़क तो डामरीकृत हो चुकी है।
Villagers waiting for Jawadirola bridge 19 years
पौड़ी गढ़वाल जिले के नैनीडॉडा ब्लॉक के अंतर्गत सन 2006 की स्वीकृत रौंदेड़ी पुनोडी चिल्लाऊं सड़कमार्ग पर जवाडीरोला पुल को बनने में डेढ़ दशक से ऊपर का समय हो गया। लेकिन तब से अब तक इस पुल पर दो पीलर खड़े कर के कार्य की इतिश्री कर दी गई। स्थानीय लोगों द्वारा लगातार पत्राचार सी एम हेल्पलाइन पोर्टल और तीन बार के स्थानीय विधायक को भी कई बार ज्ञापन दिया जा चुका है। लेकिन उसके बाद भी स्थिति जस की तस है, ग्रामीणों की समस्या से ना ही प्रशासन और नहीं नेताओं का ध्यान है।
वोट के लिए विधायक ने भी किया था पुनरुद्घाटन
विभाग और स्थानीय विधायक कभी वित्तीय समस्याओं का हवाला देकर, तो कभी जल्दी कार्य शुरू करने का आश्वासन देकर स्थानीय लोगों को टालते रहते हैं। जबकि 2020/21 में यानि पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान स्थानीय विधायक ने खुद इस निर्माणाधीन पुल का उद्घाटन था। लेकिन तब से 5 साल हो गए हैं लेकिन अब तक पुल के नाम पर दो पीलर खड़े किए गए हैं। इस सड़कमार्ग पर पुल ना बनने से दर्जनों गांव सड़क मार्ग से वंचित है जबकि आधी से अधिक सड़क डामरीकृत हो चुकी है। जनता मांग करते करते थक चुकी है, लेकिन सरकार बहाने बनाते और नजर अंदाज करते हुए नहीं थक रही है।
उफानी नदी तैर कर पार करते हैं स्थानीय लोग
गढ़वाल में पलायन के लिए ये समस्याएं भी एक मुख्य कारण है। पुल निर्माण ना होने के कारण दर्जनों गांव के लोगों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। गांव से किसी गर्भवती महिला, बुजुर्ग या बीमार व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाने के लिए कई किमी पैदल चलना पड़ता है। जब सरकार और प्रशासन ग्रामीणों की इन परेशानियों को लगातार नजरंदाज करती है तो, लोगों के पास उस जगह को छोड़कर सुविधाजनक जगहों पर बसने के अलावा कोई रास्ता नहीं रहता है। चुनाव के दौरान नेता वोट मांगने के लिए जनता से कई वादे करते हैं, लेकिन चुनाव जीतने के बाद वही नेता ग्रामीणों की समस्या को पूरी तरह नजर अंदाज करते हैं।