त्तरकाशी के धराली में आपदा के दूसरे दिन यानि बीते बुधवार तक 274 लोगों को रेस्क्यू कर लिया गया था, जिनमें से 13 लोग बुरी तरह घायल हुए हैं। वहीं आज गुरूवार सुबह 65 लोगों को एयरलिफ्ट कर मातली पहुंचाया गया।
Image: Rescue operation continues in Uttarkashi Dharali Disaster
उत्तरकाशी: धराली में आई प्राकृतिक आपदा के बाद आज तीसरे दिन भी रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। भारतीय सेना, आईटीबीपी, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और स्थानीय पुलिस धराली में राहत और बचाव कार्यों में लगी हुई है।
Rescue operation continues in Uttarkashi Dharali Disaster
उत्तरकाशी के धराली में आपदा के दूसरे दिन यानि बीते बुधवार तक 274 लोगों को रेस्क्यू कर लिया गया था, जिनमें से 13 लोग बुरी तरह घायल हुए हैं। वहीं आज गुरूवार सुबह 65 लोगों को एयरलिफ्ट कर मातली पहुंचाया गया। धराली आपदा में अब तक 5 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं बचाए गए लोगों को हेलीकॉप्टर से मातली पहुँचाया गया और अब उन्हें सुरक्षित उनके गंतव्यों तक पहुँचाया जा रहा है। धराली और हरसिल के प्रभावित इलाकों में भारतीय सेना, NDRF, ITBP, SDRF, उत्तराखंड पुलिस और स्थानीय प्रशासन उत्तरकाशी लगातार बचाव अभियान चला रहे हैं। मातली स्वास्थ्य शिविर से गंभीर रूप से घायल दो लोगों को एम्स ऋषिकेश रेफर कर दिया गया है।
पर्यटकों को सुरक्षित पहुंचाया हर्षिल गया
सचिव आपदा प्रबंधन के अनुसार अब तक गुजरात के 131, महाराष्ट्र के 123, मध्य प्रदेश के 21, उत्तर प्रदेश के 12, राजस्थान के 6, दिल्ली के 7, असम के 5, कर्नाटक के 5, तेलंगाना के 3 और पंजाब का 1 तीर्थयात्री को सुरक्षित हर्षिल पहुंचाया गया है। इन सभी यात्रियों को हर्षिल से उत्तरकाशी और देहरादून लाने की प्रक्रिया लगातार जारी है। इनके अलावा 135 लोगों को सुरक्षित रूप से हर्षिल से बाहर निकाला गया। जिनमें से 100 लोगों को उत्तरकाशी पहुंचाया गया है और 35 लोगों को देहरादून सुरक्षित भेजा गया है।
आज पूरे दिन चलेगा हेलीकॉप्टर अभियान
संगढ़वाल मंडल के आयुक्त विनय शंकर पांडे ने कहा, "हमारा हेलीकॉप्टर अभियान शुरू हो गए हैं और ये अभियान आज पूरे दिन चलेगा। भारतीय वायुसेना का एक चिनूक विमान जल्द ही जॉली ग्रांट हवाई अड्डे से एनडीआरएफ कर्मियों और आवश्यक सामग्रियों के साथ उड़ान भरेगा, जिन्हें हर्षिल ले जाया जाएगा। ज़िला मजिस्ट्रेट और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने क्षेत्र में अपने कार्यालय स्थापित कर लिए हैं। सभी आवश्यक सेवाओं के तकनीकी विशेषज्ञ घटना स्थल पहुँच चुके हैं।