किसानों का कहना है कि सरकार किसानों से बार-बार वादे करती है लेकिन इन वादों पर अमल नहीं करती। महंगाई और बढ़ती खेती की लागत ने पहले ही परेशान कर रखा है। ऐसे में स्मार्ट मीटर और बकाया वसूली किसानों की कमर तोड़ने का काम कर रहे हैं।
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राज्य समीक्षा डेस्क
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Image: Farmer indefinite strike on smart meters in Roorkee
रुड़की: किसानों ने रुड़की एसडीएम कोर्ट परिसर में अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया है। बड़ी संख्या में जुटे किसानों ने सरकार को चेतावनी दी कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
Farmer indefinite strike on smart meters in Roorkee
रुड़की एसडीएम कोर्ट परिसर में धरने पर बैठे किसान नेताओं ने अपनी तीन प्रमुख मांगें सामने रखीं हैं। किसानों का कहना है कि स्मार्ट मीटर लगाए जाने से बिजली बिलों में बेहद वृद्धि हो रही है। खेती पहले ही घाटे का सौदा बन चुकी है और ऐसे में अतिरिक्त बोझ किसान विरोधी है। ऐसे में किसान स्मार्ट मीटर लगाए जाने का विरोध कर रहे हैं। किसानों की दूसरी मांग यह है कि शुगर मिलों पर किसानों का करोड़ों रुपये बकाया है। समय पर भुगतान न होने से किसान कर्ज में डूब रहे हैं और उनकी आर्थिक स्थिति लगातार बिगड़ रही है। किसान चाहते हैं कि शुगर मिल उनके गन्ना बकाया का शीघ्र भुगतान करें। किसान की तीसरी मांग पुराने बिजली बकाया बिलों में उन्हें छूट दी जाए। उनका कहना है कि पुराने बिजली बकाया बिल वसूली करना अन्याय है, क्योंकि किसानों की आय लागत से मेल नहीं खाती। सरकार को तत्काल राहत देनी चाहिए।
सरकार से वादे करती अमल नहीं करती
किसान नेताओं का कहना है कि सरकार किसानों से बार-बार वादे करती है लेकिन इन वादों पर अमल नहीं किया जाता है। महंगाई और बढ़ती खेती की लागत ने ग्रामीण और किसान परिवारों को पहले ही परेशान कर रखा है। ऐसे में स्मार्ट मीटर और बकाया वसूली किसानों की कमर तोड़ने का काम कर रहे हैं। किसानों ने धमकी दी है यदि उनकी मांगों पर तुरंत ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह धरना एक राज्यव्यापी आंदोलन का रूप लेगा। उनका कहना है कि यह संघर्ष सिर्फ किसानों के लिए नहीं, बल्कि पूरे ग्रामीण समाज की समस्याओं से जुड़ा हुआ है।
जारी रहेगा अनिश्चितकालीन धरना
भारी संख्या में जुटे सभी किसानों ने एकजुट होकर सरकार के खिलाफ नारे लगाए और साफ कहा कि अब किसान पीछे नहीं हटेंगे। किसान नेताओं ने कहा कि यह अनिश्चितकालीन धरना तब तक जारी रहेगा, जब तक सरकार उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लेती। उनका कहना है कि सरकार को यह समझना होगा कि किसान केवल अन्नदाता ही नहीं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। यदि उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो आंदोलन केवल प्रदेश में नहीं, बल्कि पूरे देश में हो सकता है।