उत्तराखंड: मधुमिता शुक्ला हत्याकांड के दोषी संतोष राय की होगी रिहाई, हाईकोर्ट ने दिए आदेश

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने मधुमिता शुक्ला हत्याकांड के दोषी संतोष कुमार राय समेत तीन कैदियों की समय पूर्व रिहाई के आदेश जारी किए हैं। राज्य सरकार की नई सूची और समय पूर्व रिहाई नीति के तहत यह फैसला लिया गया है।
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Madhumita Shukla Murder Case: Uttarakhand High Court Orders Release of Three Prisoners
Image: Uttarakhand High Court Orders Release of Three Prisoners

नैनीताल: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने उम्रकैद की सजा काट रहे कैदियों की समय पूर्व रिहाई (Premature Release) से जुड़े मामले में अहम आदेश दिया है। हाईकोर्ट ने कवयित्री मधुमिता शुक्ला हत्याकांड के दोषी संतोष कुमार राय समेत तीन कैदियों की रिहाई के आदेश जारी किए हैं। संतोष राय को वर्ष 2003 में उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। अदालत ने स्पष्ट किया है कि संबंधित दस्तावेज जेल प्रशासन तक पहुंचने के बाद रिहाई की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

Uttarakhand High Court Orders Release of Three Prisoners

न्यायमूर्ति रविंद्र मैठाणी और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह की खंडपीठ ने स्वतः संज्ञान याचिका और कैदियों की अन्य याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई की। सुनवाई के दौरान अदालत ने संतोष कुमार राय समेत तीन कैदियों की समय पूर्व रिहाई के आदेश दिए। अदालत के निर्देश के अनुसार, संबंधित आदेश और दस्तावेज जेल प्रशासन को प्राप्त होने के बाद कैदियों की रिहाई की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

14 साल या उससे अधिक सजा काट चुके कैदियों का मामला

यह पूरा मामला उत्तराखंड सरकार की समय पूर्व रिहाई नीति से जुड़ा हुआ है। अदालत में ऐसे कैदियों की रिहाई का मुद्दा उठाया गया था, जो 14 साल या उससे अधिक समय जेल में बिता चुके हैं। इनमें कई कैदी ऐसे भी हैं, जो 20 से 25 साल तक जेल में रह चुके हैं। याचिकाकर्ताओं की ओर से तर्क दिया गया कि राज्य सरकार की नीति के तहत पात्र कैदियों को कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए समय पूर्व रिहाई का लाभ मिलना चाहिए। उनका कहना था कि उम्रकैद का मतलब यह नहीं है कि प्रत्येक कैदी को हर हाल में पूरी जिंदगी जेल में ही बितानी पड़े। पात्रता और निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के आधार पर समय पूर्व रिहाई पर विचार किया जाना चाहिए।

सरकार ने कोर्ट में पेश की नई सूची

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से समय पूर्व रिहाई के लिए पात्र कैदियों की नई सूची अदालत में पेश की गई। इसी सूची के आधार पर हाईकोर्ट ने रिहाई से संबंधित निर्देश जारी किए। अदालत को बताया गया कि समय पूर्व रिहाई के लिए गठित समिति की जुलाई और सितंबर में भी बैठकें हो चुकी हैं। समिति की प्रक्रिया के तहत पात्र कैदियों को चरणबद्ध तरीके से रिहा किया जा रहा है। हालांकि, अभी तक कुल कितने कैदियों को इस नीति के तहत रिहा किया जा चुका है, इसका सटीक आंकड़ा उपलब्ध नहीं कराया गया।

क्या है कवयित्री मधुमिता शुक्ला हत्याकांड?

मधुमिता शुक्ला हत्याकांड उत्तर प्रदेश के चर्चित हाई-प्रोफाइल मामलों में शामिल रहा है। 24 वर्षीय कवयित्री मधुमिता शुक्ला की 9 मई 2003 को लखनऊ की पेपर मिल कॉलोनी स्थित उनके अपार्टमेंट में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। मामले की निष्पक्ष सुनवाई की मांग को लेकर उनकी बहन निधि शुक्ला ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। इसके बाद वर्ष 2005 में सुप्रीम कोर्ट ने मामले को उत्तराखंड के देहरादून में स्थानांतरित कर दिया था।देहरादून की विशेष अदालत ने अक्टूबर 2007 में मधुमिता शुक्ला हत्याकांड में फैसला सुनाया था। अदालत ने पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी, उनकी पत्नी मधुमणि और तीन अन्य आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इस फैसले को बाद में नैनीताल हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने भी बरकरार रखा था। अब इस मामले में दोषी शूटर संतोष कुमार राय को समय पूर्व रिहाई के आदेश मिलने से यह मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। हालांकि, जेल से वास्तविक रिहाई संबंधित दस्तावेज जेल प्रशासन तक पहुंचने और आवश्यक प्रक्रिया पूरी होने के बाद होगी।