चमोली के ज्योतिर्मठ क्षेत्र में हेलिकॉप्टर हादसे में मारे गए सभी छह लोगों के शवों को सड़क तक पहुंचाने के लिए सेना, SDRF, NDRF और ITBP का रेस्क्यू अभियान जारी है। हादसे की जांच DGCA और AAIB की विशेषज्ञ टीमें करेंगी
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राज्य समीक्षा डेस्क
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Image: Joshimath Helicopter Crash Six Dead DGCA to Probe Accident
चमोली: उत्तराखंड के चमोली जिले के ज्योतिर्मठ क्षेत्र में हुए हेलिकॉप्टर हादसे के बाद रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। दुर्घटना में जान गंवाने वाले सभी छह लोगों के शव देर रात सेना ने अपने कब्जे में ले लिए थे, लेकिन अंधेरा और दुर्गम रास्ता होने के कारण शवों को सड़क तक नहीं पहुंचाया जा सका। शनिवार सुबह एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, आईटीबीपी और भारतीय सेना की टीमें दोबारा घटनास्थल पर पहुंचीं और शवों को सड़क तक लाने का अभियान शुरू किया।
Joshimath Helicopter Crash: Six Dead, DGCA to Probe Accident
ज्योतिर्मठ क्षेत्र में हादसे का घटनास्थल बेहद दुर्गम पहाड़ी इलाके में स्थित है। यहां से सड़क की दूरी करीब 10 से 12 किलोमीटर है। ऐसे में रेस्क्यू टीमों को शवों को सड़क तक लाने के लिए कठिन पहाड़ी रास्तों से गुजरना पड़ रहा है। प्रशासन के अनुसार, हादसे में मारे गए सभी छह लोगों के शव बुरी तरह क्षत-विक्षत हालत में हैं। इस वजह से रेस्क्यू ऑपरेशन में अधिक समय लग रहा है। सुरक्षा और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, आईटीबीपी और सेना के जवान पूरी सतर्कता के साथ अभियान चला रहे हैं।
DGCA और AAIB की टीम करेगी हेलिकॉप्टर हादसे की जांच
हेलिकॉप्टर दुर्घटना के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB) और नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) की विशेषज्ञ टीम जांच करेगी। जानकारी के अनुसार, शनिवार को विशेषज्ञों की टीम उत्तराखंड पहुंचेगी। जांच के दौरान दुर्घटनास्थल और हेलिकॉप्टर से जुड़े तकनीकी पहलुओं की पड़ताल की जाएगी। जांच पूरी होने के बाद ही हादसे की असली वजह स्पष्ट हो सकेगी।
चारधाम यात्रा के अंतिम चरण में पहला हेलिकॉप्टर हादसा
इस साल चारधाम यात्रा के अंतिम चरण में यह पहला हेलिकॉप्टर हादसा बताया जा रहा है। हालांकि, उत्तराखंड में पिछले वर्षों के दौरान भी हेलिकॉप्टर दुर्घटनाओं की घटनाएं सामने आती रही हैं। वर्ष 2025 की चारधाम यात्रा के दौरान कुल पांच हेलिकॉप्टर हादसे हुए थे। इनमें तीन घटनाओं में आपातकालीन लैंडिंग के दौरान हेलिकॉप्टर क्षतिग्रस्त हुए थे, लेकिन किसी की जान नहीं गई थी। वहीं, उत्तरकाशी और केदार घाटी में हुई दो हेलिकॉप्टर दुर्घटनाओं में पायलट सहित 13 यात्रियों की मौत हुई थी।
हेलिकॉप्टर संचालन को लेकर बढ़ाई गई थी निगरानी
लगातार सामने आ रही हेलिकॉप्टर दुर्घटनाओं के बाद उत्तराखंड सरकार और डीजीसीए ने हवाई सेवाओं की सुरक्षा को लेकर कई कदम उठाए थे। डीजीसीए के दिशा-निर्देशों के तहत हेलिकॉप्टर संचालन के लिए एसओपी तैयार करने के साथ निगरानी व्यवस्था को भी मजबूत किया गया। सोनप्रयाग और सहस्त्रधारा में एयर ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम (ATS) और सीसीटीवी कैमरे स्थापित किए गए। इसके अलावा मौसम खराब होने की स्थिति में हेलिकॉप्टरों को उड़ान की अनुमति नहीं देने के निर्देश भी दिए गए हैं।
छह लोगों की मौत के बाद हवाई सुरक्षा पर फिर उठे सवाल
ज्योतिर्मठ क्षेत्र में हुए इस हादसे ने उत्तराखंड में चारधाम यात्रा के दौरान हेलिकॉप्टर सेवाओं की सुरक्षा को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। फिलहाल प्राथमिकता सभी छह शवों को दुर्गम घटनास्थल से सुरक्षित सड़क तक पहुंचाने की है। वहीं, DGCA और AAIB की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि दुर्घटना किन परिस्थितियों में हुई और इसके पीछे तकनीकी खराबी, मौसम या कोई अन्य कारण जिम्मेदार था।