विरासत में उप्रेती बहनों ने छपेली, सधाई गीत, छबीली, छंचुरी, हेनोली, रासो, सांठो-आठों गीत जैसी पारंपरिक रचनाएँ प्रस्तुत की, हर एक प्रस्तुति उत्तराखंड की पहाड़ियों की लयबद्ध और काव्यात्मक सुंदरता को दर्शाती रही।
-
राज्य समीक्षा डेस्क
-
Advertisement
90% ट्रेकर्स नहीं जानते केदार हिमालय के ये सीक्रेट रूट्स
प्रकृति से जुड़ने और आत्मिक शांति पाने का अवसर। केदार हिमालय की वो यात्राएं जो ज़िंदगी भर याद रहती हैं।
Example Ads Media
Image: The Upreti sisters Pahadi Show in Virasat Dehradun
देहरादून: विरासत महोत्सव में गुरुवार की शाम मधुर और मनमोहक बन गई, जब उत्तराखंड की समृद्ध गढ़वाली, कुमाऊनी और जौनसारी संस्कृति को उप्रेती बहनों ने अपने मधुर गीतों के माध्यम से प्रदर्शित किया।
The Upreti sisters Pahadi Show in Virasat Dehradun
देहरादून में विरासत महोत्सव चल रहा है। कल (गुरूवार) की शाम उप्रेती बहनों के नाम रही, उन्होंने अपनी प्रस्तुति की शुरुआत गणेश वंदना और न्योली से की, जिसमें देवताओं को समर्पित मधुर प्रस्तुतियों के माध्यम से दिव्य आशीर्वाद का आह्वान किया गया। उसके बाद सगुन आखर और मंगल गीत प्रस्तुत किए गए। उत्तराखंड के लोक गीतों की शानदार प्रस्तुति से उप्रेती बहनों ने विरासत की महफिल सजा दी। अपनी प्रस्तुति के अंत में छपेली, सधाई गीत, छबीली, छंचुरी, हेनोली, रासो, सांठो-आठों गीत जैसी पारंपरिक गीतों की रचनाएँ प्रस्तुत की गईं, हर एक प्रस्तुति उत्तराखंड की पहाड़ियों की लयबद्ध और काव्यात्मक सुंदरता को दर्शाती रही। उप्रेती बहनों के साथ प्रतिभाशाली कलाकार दिनेश कृष्ण, पंडित अजय शंकर मिश्रा, राम चरण जुयाल मुरचन, राघव गौधियाल, अमित डंगवाल, रवीन राणा और मोहित जोशी ने दी।
उत्तराखंड लोक संस्कृति की ध्वजवाहक उप्रेती बहनें
उप्रेती बहनें ज्योति उप्रेती सती और नीरजा उप्रेती उत्तराखंड की संस्कृति पर केंद्रित पारंपरिक लोक संगीत प्रस्तुत करने के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने भारत पर्व और यंग उत्तराखंड सिने अवार्ड्स सहित कई कार्यक्रमों में प्रस्तुति दी है। इन दोनों बहनों का एक यू ट्यूब चैनल भी है, जहां वे संस्कृत श्लोकों और उत्तराखंड के पारंपरिक गीतों की प्रस्तुतियाँ प्रस्तुत करती हैं। बड़ी बहन ज्योति उप्रेती सती एक पेशेवर गायिका, संगीतकार और गीतकार है, जबकि छोटी बहन डॉ. नीरजा उप्रेती फिजियोथेरेपिस्ट होने के साथ-साथ मशहूर गायिका भी हैं। उन्हें उत्तराखंड के पारंपरिक गीतों के लिए जाना जाता है, जो गढ़वाल, कुमाऊँ और जौनसार क्षेत्रों की विरासत दर्शाते हैं।