ऋषिकेश: शराब की दुकान पर अधिकार को भिड़े 2 सरकारी विभाग, कई अधिनियमों के उल्लंघन का दावा

दोनों विभागों के बीच चल रहे विवाद को देखते हुए टिहरी की जिलाधिकारी नितिका खंडेलवाल ने राज्य सरकार को पत्र लिखकर मांग की है कि मामले को सुलझाने के लिए एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया जाए।
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Clash between two depts: Two govt departments clash over liquor shop rights
Image: Two govt departments clash over liquor shop rights

ऋषिकेश: उत्तराखंड के ऋषिकेश क्षेत्र में आरक्षित वन भूमि के बीच कथित रूप से संचालित एक शराब की दुकान को लेकर दो विभागों वन विभाग और राजस्व विभाग के बीच विवाद गहरा गया है। दोनों विभाग इस भूमि पर अपने-अपने अधिकार का दावा कर रहे हैं, जिससे मामला एक बड़े विवाद का रूप ले चुका है।

Two govt departments clash over liquor shop rights

उत्तराखंड वन विभाग ने पहली बार आधिकारिक रूप से स्वीकार किया है कि यह जमीन आरक्षित वन क्षेत्र के अंतर्गत आती है। विभाग ने अपने दावे के समर्थन में 1935-36 के सर्वे ऑफ इंडिया के नक्शे का हवाला दिया है। वन अधिकारियों का कहना है कि नेशनल हाइवे पुल से लेकर पीडब्ल्यूडी तिराहे तक का दायाँ हिस्सा, जिसमें विदेशी शराब की दुकान भी शामिल है, शिवपुरी रेंज, मुनी की रेती कंपार्टमेंट नंबर 1 के अंतर्गत आरक्षित वन है।

राज्य सरकार से मामला सुलझाने की मांग

दूसरी ओर, राजस्व विभाग का दावा है कि 1931 के राजस्व अभिलेख इस भूमि को ‘बैनीप (असर्वेक्षित) भूमि’ के रूप में दर्ज करते हैं, जो उत्तराखंड सरकार के स्वामित्व वाली श्रेणी में आती है। विभाग का कहना है कि इसी आधार पर दुकान चलाने के लिए भूमि आवंटित की गई थी। दोनों विभागों के बीच चल रहे विवाद को देखते हुए टिहरी की जिलाधिकारी नितिका खंडेलवाल ने राज्य सरकार को पत्र लिखकर मांग की है कि मामले को सुलझाने के लिए एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया जाए।

शराब की दुकान के खिलाफ शिकायतें

दरअसल, ऋषिकेश के मुनि की रेती क्षेत्र में एक स्थानीय युवक की उसके नशे में धुत मित्र द्वारा 25 अक्टूबर को हत्या किए जाने के बाद स्थानीय लोगों ने शराब की दुकान के खिलाफ लगातार शिकायतें कीं। इन शिकायतों को आधार बनाकर पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) ने उत्तराखंड सरकार को पत्र लिखकर मामले की जांच करने और वन संरक्षण अधिनियम तथा पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के उल्लंघन पर उचित कार्रवाई करने को कहा।

विवादित क्षेत्र में है शराब की दुकान

सरकार के निर्देश पर वन विभाग और राजस्व विभाग ने संयुक्त निरीक्षण किया। इसके बाद भी दोनों विभाग अपने-अपने दावों पर कायम हैं। वन अधिकारियों का कहना है कि मुनी की रेती के दो वार्ड, जिनमें लगभग 200 परिवार रहते हैं, उनके बीच की सीमा विवादित है। शराब की दुकान इसी विवादित क्षेत्र में आती है। नरेंद्रनगर के डिविजनल फॉरेस्ट ऑफिसर दिगंत नायक ने बताया कि स्पष्ट सीमा निर्धारण के लिए सर्वे ऑफ इंडिया द्वारा पुन: सर्वेक्षण कराना आवश्यक है। ऋषिकेश एक ड्राई एरिया है, जहां शराब की बिक्री प्रतिबंधित है। ऐसे में शहर की सीमा के बाहर स्थित यह दुकान अत्यधिक लाभकारी मानी जाती है। दुकान का लाइसेंस पहली बार 2018 में जारी किया गया था। जून 2024 में इसे फिर से 1.81 लाख रुपये में आवंटित किया गया।

गैर-वन गतिविधि

आरक्षित वन भूमि पर किसी भी व्यावसायिक गतिविधि का संचालन ‘‘गैर-वन गतिविधि’’ माना जाता है, यह वन (संरक्षण) अधिनियम, 1980, भारतीय वन अधिनियम, 1927 और पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 का उल्लंघन है। इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट के गोदावर्मन फैसले के अनुसार किसी भी वन भूमि को बिना केंद्रीय अनुमति के गैर-वन कार्यों के लिए उपयोग में नहीं लाया जा सकता है।