रेजिमेंट में पहली बार पंडित, मौलवी और पादरी—तीनों द्वारा विभिन्न धर्मों के पवित्र ग्रंथ परेड ग्राउंड में लाए गए। अग्निवीरों ने अपने-अपने धर्मग्रंथों पर हाथ रखकर पद एवं गोपनीयता की शपथ ली,
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राज्य समीक्षा डेस्क
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Image: 464 Agniveers became part of Indian Army
कोटद्वार: गढ़वाल राइफल्स मुख्यालय में शनिवार का दिन इतिहास के स्वर्णिम पन्नों में दर्ज हो गया। परेड ग्राउंड में आयोजित पासिंग आउट परेड के दौरान देशभक्ति, अनुशासन और सैन्य परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिला। विभिन्न जिलों से आए अभिभावकों और परिजनों की मौजूदगी में जब नव–प्रशिक्षित अग्निवीरों ने कदमताल मिलाते हुए मैदान में प्रवेश किया, तो उत्साह और गर्व की लहर हर ओर फैल गई।
464 Agniveers became part of Indian Army
करीब सात महीने तक चले कठिन एवं चुनौतीपूर्ण सैन्य प्रशिक्षण को सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद कुल 464 अग्निवीर रिक्रूट्स भारतीय सेना की प्रतिष्ठित गढ़वाल राइफल्स रेजिमेंट में विधिवत रूप से शामिल हुए। इस बैच में गढ़वाल राइफल्स के साथ-साथ प्रादेशिक सेना के अग्निवीर भी सम्मिलित रहे। इन जवानों ने शारीरिक क्षमता, सामरिक ज्ञान, ड्रिल, हथियार संचालन और युद्धक अभ्यास में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए सेना के निर्धारित मानकों को पूरा किया। परेड की सलामी और निरीक्षण का सम्मान ब्रिगेडियर विनोद सिंह नेगी (विशिष्ट सेवा मेडल), कमांडेंट गढ़वाल राइफल्स रेजिमेंटल सेंटर, को प्राप्त हुआ। उन्होंने परेड ग्राउंड का निरीक्षण करते हुए सभी अग्निवीरों के शौर्य और समर्पण की सराहना की।
अनुशासित और आकर्षक मार्च पास्ट
ब्रिगेडियर विनोद सिंह नेगी ने कहा कि भारतीय सेना केवल एक संगठन नहीं, बल्कि अनुशासन, निष्ठा और राष्ट्रभक्ति की प्रतीक है। उन्होंने नए अग्निवीरों को राष्ट्र की सुरक्षा के लिए सदैव तत्पर रहने और रेजिमेंट की गौरवशाली विरासत को आगे बढ़ाने की प्रेरणा दी। नायक भवानी दत्त जोशी वीर चक्र परेड ग्राउंड में हुए इस भव्य आयोजन में अग्निवीरों ने अत्यंत अनुशासित और आकर्षक मार्च पास्ट प्रस्तुत किया। उनके कदमों की तेज़ ताल, सीधी पंक्तियाँ और युद्धक कौशल का प्रदर्शन देखते ही बन रहा था। परेड के हर चरण पर दर्शक दीर्घा से तालियों की गड़गड़ाहट गूंज उठी।
अग्निवीरों के अभिभावकों को मिला “गौरव पदक”
सेना द्वारा अग्निवीरों के माता-पिता व अभिभावकों को “गौरव पदक” देकर सम्मानित किया गया। मंच पर पदक लेते समय उनकी आंखों में चमकते गर्व और भावुकता के भाव उपस्थित हर व्यक्ति के हृदय को छू रहे थे। कुल 31 सप्ताह के कठोर प्रशिक्षण ने इन 464 अग्निवीरों को शारीरिक, मानसिक और व्यावसायिक रूप से परिपक्व बनाया है। अब वे भारतीय सेना की इस गौरवशाली रेजिमेंट का हिस्सा बनकर राष्ट्र सुरक्षा के दायित्व को पूरी निष्ठा और सामर्थ्य के साथ निभाने के लिए तैयार हैं।
परेड ग्राउंड में तीन धर्मों के पवित्र ग्रंथ
इस समारोह की एक विशेष बात यह रही कि रेजिमेंट में पहली बार पंडित, मौलवी और पादरी—तीनों द्वारा विभिन्न धर्मों के पवित्र ग्रंथ परेड ग्राउंड में लाए गए। अग्निवीरों ने अपने-अपने धर्मग्रंथों पर हाथ रखकर पद एवं गोपनीयता की शपथ ली, जो भारत की सांस्कृतिक और धार्मिक विविधता की सुंदर मिसाल पेश करता है। समारोह के बाद नए सैनिकों ने परेड ग्राउंड में अपने परिवारों से मुलाकात की। उत्तरकाशी, टिहरी और जौनसार-बावर से आए कई परिजन पारंपरिक पहनावों में नजर आए, जिससे मैदान में लोक संस्कृति की मनमोहक झलक देखने को मिली।