टिहरी गढ़वाल के कीर्तिनगर निवासी उत्तराखंड पुलिस के जवान राजेंद्र सिंह नेगी की गांव पहुंचने पर पगडंडी से गिरकर मौत हो गई। डेढ़ माह की बेटी के सिर से उठा पिता का साया।
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राज्य समीक्षा डेस्क
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Image: Tragic death of a police constable in Tehri Garhwal
टिहरी गढ़वाल: वर्दी के पीछे भी एक परिवार, सपने और मासूम जिंदगियां होती हैं। राजेंद्र सिंह नेगी का असमय जाना न सिर्फ उनके परिवार, बल्कि समाज और पुलिस विभाग के लिए भी अपूरणीय क्षति है। राजेंद्र सिंह नेगी की डेढ़ माह की एक मासूम बेटी है, जिसके सिर से हमेशा के लिए पिता का साया उठ गया है।
Tragic death of a police Javaan in Tehri Garhwal
टिहरी गढ़वाल जिले से एक बेहद दुखद और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। उत्तराखंड पुलिस में तैनात एक जवान की पत्थर से टकराने के कारण मौत हो गई। इस हादसे के बाद मृतक के परिवार में कोहराम मचा हुआ है, जबकि पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है।
घर में आग लगी, सब कुछ जलकर राख
प्राप्त जानकारी के अनुसार, कीर्तिनगर क्षेत्र के बेंजवाड़ी गांव निवासी 28 वर्षीय राजेंद्र सिंह नेगी वर्तमान में अपने परिवार के साथ देहरादून के नकरौंदा इलाके में रहते थे और वहीं पुलिस विभाग में तैनात थे। बीते बुधवार देर रात करीब 12:30 बजे उनके पैतृक घर में शॉर्ट सर्किट से अचानक आग लग गई। इस आग में बिस्तर, कपड़े, खाद्य सामग्री, आभूषण, बर्तन और जरूरी घरेलू सामान सब कुछ जलकर राख हो गया। ग्रामीणों और दमकल विभाग की टीम ने काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया, लेकिन तब तक भारी नुकसान हो चुका था।
गांव पहुंचते ही हुआ दर्दनाक हादसा
जैसे ही आग लगने की सूचना राजेंद्र सिंह नेगी को मिली, वे गुरुवार को तुरंत अपने गांव पहुंचे। गांव पहुंचने के बाद रात करीब 8 बजे वे पगडंडी के रास्ते अपने चाचा के घर जा रहे थे। इसी दौरान अचानक पैर फिसलने से वे करीब 50 मीटर नीचे सड़क पर गिर पड़े। गिरते समय उनका सिर एक पत्थर से टकराया, जिससे वे गंभीर रूप से घायल होकर बेहोश हो गए।
अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने किया मृत घोषित
घटना के तुरंत बाद परिजन उन्हें उपचार के लिए श्रीकोट बेस अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन वहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस खबर से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।
डेढ़ माह की बेटी के सिर से उठा पिता का साया
राजेंद्र सिंह नेगी की डेढ़ माह की एक मासूम बेटी है, जिसके सिर से हमेशा के लिए पिता का साया उठ गया। यह दृश्य जिसने भी देखा, उसकी आंखें नम हो गईं। इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर यह सच्चाई सामने रख दी है कि वर्दी के पीछे भी एक परिवार, सपने और मासूम जिंदगियां होती हैं। राजेंद्र सिंह नेगी का असमय जाना न सिर्फ उनके परिवार, बल्कि समाज और पुलिस विभाग के लिए भी अपूरणीय क्षति है।
राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई
दिवंगत पुलिस जवान का अंतिम संस्कार हरिद्वार के खड़खड़ी श्मशान घाट में राजकीय सम्मान के साथ किया गया। इस दौरान पुलिस विभाग के अधिकारी, सहकर्मी, परिजन और स्थानीय लोग बड़ी संख्या में मौजूद रहे।