गाजियाबाद में कोरियन ऑनलाइन गेमिंग से जुड़ी घटना के बाद देहरादून प्रशासन अलर्ट मोड पर आ गया है। जिलाधिकारी सविन बंसल ने स्कूलों के लिए ऑनलाइन गेमिंग को लेकर एडवाइजरी जारी की है..
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Image: DM Savin Bansal issued a gaming advisory
देहरादून: गाजियाबाद में सामने आई कोरियन ऑनलाइन गेमिंग से जुड़ी दर्दनाक घटना के बाद देहरादून प्रशासन सतर्क हो गया है। बच्चों और किशोरों में बढ़ती ऑनलाइन गेमिंग की लत को गंभीरता से लेते हुए जिला प्रशासन ने स्कूलों के लिए विशेष एडवाइजरी जारी की है। जिलाधिकारी सविन बंसल ने संतुलित डिजिटल उपयोग और बच्चों के डिजिटल व्यवहार पर निगरानी के स्पष्ट निर्देश दिए हैं।
DM Savin Bansal issued a gaming advisory
देहरादून डीएम सविन बंसल के निर्देश पर जारी एडवाइजरी में कहा गया है कि स्कूल स्तर पर बच्चों के स्क्रीन टाइम और ऑनलाइन गतिविधियों पर ध्यान दिया जाए। शिक्षण संस्थानों को यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि छात्रों को डिजिटल प्लेटफॉर्म का सकारात्मक और सीमित उपयोग सिखाया जाए। इसके साथ ही शिक्षकों को भी बच्चों के व्यवहार में होने वाले बदलावों पर नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं।
अभिभावकों को जागरूक करने पर जोर
जिलाधिकारी ने कहा कि ऑनलाइन गेमिंग की लत केवल बच्चों तक सीमित समस्या नहीं है, बल्कि यह परिवार और समाज से भी जुड़ा विषय है। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे बच्चों की गेमिंग आदतों, मोबाइल फोन के उपयोग और मानसिक स्थिति पर नियमित रूप से ध्यान दें। जरूरत पड़ने पर काउंसलिंग और संवाद के जरिए बच्चों को सही दिशा देने की सलाह दी गई है।
गाजियाबाद की घटना ने बढ़ाई चिंता
4 फरवरी को उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से आई खबर ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया। यहां एक रिहायशी इमारत की नौवीं मंजिल से कूदकर तीन सगी बहनों ने अपनी जान दे दी। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि तीनों नाबालिग थीं, जिनकी उम्र 12, 14 और 16 वर्ष बताई जा रही है।
कोरियन टास्क-बेस्ड गेमिंग की आशंका
हालांकि घटना के पीछे की वजह की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है, लेकिन शुरुआती रिपोर्ट्स के मुताबिक तीनों बहनें कोरियन ऑनलाइन टास्क-बेस्ड गेमिंग ऐप की आदी थीं। पुलिस के अनुसार, घटनास्थल से एक सुसाइड नोट भी मिला है, जिसमें केवल लिखा था— “मम्मी, पापा, सॉरी।” बताया जा रहा है कि माता-पिता बच्चों की गेमिंग लत को लेकर उन्हें अक्सर समझाते और रोकते थे।
पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले
ऑनलाइन गेमिंग और डिजिटल लत से जुड़े मामलों में यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी देश के कई हिस्सों से गेमिंग एडिक्शन के कारण मानसिक तनाव और आत्मघाती कदमों की खबरें सामने आती रही हैं। विशेषज्ञों के अनुसार अत्यधिक स्क्रीन टाइम, टास्क-बेस्ड गेम्स और वर्चुअल रिवॉर्ड सिस्टम बच्चों के मानसिक संतुलन पर गहरा असर डाल सकता है।