उत्तराखंड: 15 दिन तक घर में पड़ी रही बुजुर्ग मां की लाश, परिवार सहित बाहर सेटल हैं सफल बेटे

उत्तराखंड के हरिद्वार के ज्वालापुर क्षेत्र में 65 वर्षीय बुजुर्ग महिला का 10-15 दिन पुराना शव उनके घर से बरामद हुआ। महिला अकेली रह रही थीं और कई दिनों तक फोन न उठाने पर बेटा नोएडा से हरिद्वार पहुंचा। दरवाजा तोड़ने पर शव मिला।
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Elderly Mother Found Dead: Elderly Mother Found Dead After 15 Days in Haridwar
Image: Elderly Mother Found Dead After 15 Days in Haridwar

हरिद्वार: हरिद्वार के ज्वालापुर कोतवाली क्षेत्र की आर्यनगर कॉलोनी में 65 वर्षीय बुजुर्ग महिला का शव उनके ही घर से बरामद हुआ। महिला पिछले कई वर्षों से अपने पुश्तैनी मकान में अकेली रह रही थी। बताया जा रहा है कि शव करीब 10 से 15 दिन पुराना था। जब कई दिनों तक महिला ने फोन कॉल रिसीव नहीं किए, तब उनके बेटे को अनहोनी की आशंका हुई

Elderly Mother Found Dead After 15 Days in Haridwar

जानकारी के मुताबिक, महिला के एक बेटे फरीदाबाद में बैंक ऑफ इंडिया में कार्यरत हैं, जबकि दूसरे बेटे ने आईबी से वीआरएस लिया है और दिल्ली में परिवार के साथ रहते हैं। जब लगातार कॉल करने के बावजूद मां ने फोन नहीं उठाया, तो नोएडा से बेटा हरिद्वार पहुंचा। घर पहुँचकर दरवाजा खटखटाने पर भी कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। इसके बाद आसपास के लोगों की मदद से दरवाजा तोड़ा गया। दरवाजा खुलते ही अंदर का दृश्य दिल दहला देने वाला था। घर के भीतर से दुर्गंध आ रही थी और महिला का शव पड़ा मिला। प्रथम दृष्टया लग रहा था कि उनकी मौत कई दिन पहले हो चुकी थी।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार

सूचना मिलते ही ज्वालापुर कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर जिला अस्पताल भेज दिया। ज्वालापुर कोतवाली प्रभारी कुंदन सिंह राणा ने बताया कि प्रारंभिक अनुमान के अनुसार महिला की मृत्यु 10 से 15 दिन पहले हुई होगी। मौत के सही कारणों का पता पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही चल सकेगा।

समाज के लिए बड़ा सवाल

यह घटना केवल एक हादसा नहीं, बल्कि बदलते सामाजिक ढांचे पर गंभीर सवाल खड़ा करती है। रोजगार और व्यस्त जीवनशैली के चलते बुजुर्ग माता-पिता अक्सर अकेले रह जाते हैं। फोन पर हालचाल लेना पर्याप्त नहीं है, समय-समय पर व्यक्तिगत मुलाकात और देखभाल भी उतनी ही जरूरी है।
धर्मनगरी हरिद्वार में हुई यह घटना समाज को सोचने पर मजबूर करती है कि क्या हम अपने बुजुर्गों के प्रति जिम्मेदारी निभा पा रहे हैं?