महाशिवरात्रि 15 फरवरी 2026 को मनाई जाएगी। इस बार दुर्लभ शुभ योग बन रहे हैं। जानें पूजा का सही समय, चार प्रहर मुहूर्त, निशीथ काल, अभिषेक विधि और धन-समृद्धि के विशेष उपाय।
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राज्य समीक्षा डेस्क
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Image: 300 Years Rare Mahashivratri 2026
देहरादून: महाशिवरात्रि का पावन पर्व इस वर्ष 15 फरवरी की शाम से आरंभ हो रहा है। इस बार 300 वर्षों बाद दुर्लभ ग्रह योग एक साथ बन रहे हैं, जिससे यह पर्व और भी विशेष हो गया है। तिषाचार्यों के अनुसार इस दिन ग्रह-नक्षत्रों की अनुकूल स्थिति के कारण पूजा, व्रत और साधना का फल कई गुना बढ़ जाता है।
300 Years Rare Mahashivratri 2026
महाशिवरात्रि के दिन कुंभ राशि में बुधादित्य, शुक्रादित्य, लक्ष्मी नारायण और चतुर्ग्रही योग बन रहे हैं। इसके साथ ही सर्वार्थ सिद्धि, प्रीति, ध्रुव और व्यतिपात योग भी रहेंगे। ज्योतिष गणना के अनुसार इतने शुभ संयोग वर्षों बाद एक साथ बन रहे हैं, जो साधना और सिद्धि के लिए अत्यंत फलदायी माने जाते हैं।
शिव की त्रिगुणी सृष्टि और तीन प्रकार की पूजा
नारायण ज्योतिष संस्थान के आचार्य विकास जोशी के अनुसार भगवान शिव की त्रिगुणी सृष्टि है। शास्त्रों में शिव पूजा के तीन प्रकार बताए गए हैं — सात्विक, राजसिक और तामसिक। जो भक्त जिस भाव से शिव की आराधना करता है, भगवान उसे उसी प्रकार फल प्रदान करते हैं।
सात्विक पूजा :- गृहस्थों के लिए सात्विक पूजा श्रेष्ठ मानी गई है। इसमें दूध, दही, घी, शहद, बेलपत्र, पुष्प, फल और मिठाई से पूजन किया जाता है।
राजसिक पूजा :- इसमें भांग, धतूरा, रुद्राक्ष और कमल पुष्प अर्पित किए जाते हैं।
तामसिक पूजा :- अघोर साधना में भस्म की आरती और भस्म श्रृंगार से शिव को प्रसन्न किया जाता है। महाशिवरात्रि पर सभी प्रकार की पूजा विशेष फलदायी मानी गई है।
तिथि और शुभ मुहूर्त
फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 15 फरवरी, रविवार को शाम 5:04 बजे से प्रारंभ होगी और 16 फरवरी, सोमवार को शाम 5:34 बजे तक रहेगी। चतुर्दशी तिथि रात्रि में होने के कारण 15 फरवरी को ही महाशिवरात्रि का व्रत और पूजन किया जाएगा।
चार प्रहर की पूजा का विशेष महत्व
शास्त्रों के अनुसार महाशिवरात्रि की रात को चार प्रहरों में विभाजित कर पूजा करना अत्यंत शुभ माना गया है:
प्रथम प्रहर – 15 फरवरी शाम 6:11 बजे से रात 9:22 बजे तक
द्वितीय प्रहर – 15 फरवरी रात 9:23 बजे से 16 फरवरी रात 12:34 बजे तक
तृतीय प्रहर – 16 फरवरी रात 12:35 बजे से सुबह 3:46 बजे तक
चतुर्थ प्रहर – 16 फरवरी सुबह 3:46 बजे से सुबह 6:59 बजे तक
निशीथ काल पूजा – 16 फरवरी रात 12:09 बजे से 1:01 बजे तक, जिसे अत्यंत शुभ माना गया है।
धन और प्रतिष्ठा के लिए विशेष उपाय
महाशिवरात्रि पर कुछ विशेष उपाय करने से जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आ सकते हैं:
5 बिल्वपत्रों पर ‘राम’ लिखकर शिवलिंग पर अर्पित करें, इससे धन संबंधी कष्ट दूर होते हैं।
3 बिल्वपत्रों पर केसर और चंदन से ‘ॐ नमः शिवाय’ लिखकर अर्पित करें, इससे पद-प्रतिष्ठा में वृद्धि होती है।
अभिषेक से मिलते हैं विशेष फल
महाशिवरात्रि पर भगवान शिव का अभिषेक विशेष महत्व रखता है:
दूध से अभिषेक – मन की शांति के लिए
गन्ने के रस से – धन प्राप्ति के लिए
सरसों के तेल से – शत्रु नाश के लिए
गिलोय के रस से – आरोग्य के लिए
गंगाजल से – शिव भक्ति और आध्यात्मिक उन्नति के लिए
आध्यात्मिक उन्नति का दुर्लभ अवसर
महाशिवरात्रि केवल व्रत और पूजन का पर्व नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, तप और साधना का दुर्लभ अवसर है। इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से की गई पूजा जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लाने वाली मानी जाती है।