Uttarakhand: उत्तराखंड में बदला मौसम, 5 ज़िलों में बारिश-बर्फबारी का अलर्ट; सावधान रहें!

उत्तराखंड में आज रविवार 5 अप्रैल को कई पर्वतीय जिलों में सुबह से मौसम बलदा हुआ है। मौसम विभाग ने 5 जिलों में गरज-चमक के साथ भारी बारिश को लेकर Yellow Alert जारी किया है। स्थानीय लोगों और यात्रियों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
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Uttarakhand Weather Update: Uttarakhand Weather Update 5 April 2026
Image: Uttarakhand Weather Update 5 April 2026

देहरादून: उत्तराखंड के मौसम ने आज 5 अप्रैल 2026, रविवार को अचानक खराब मिज़ाज दिखाया है। राज्य में खासकर पर्वतीय इलाकों में मंगलवार‑बुधवार की तरह मौसम सक्रिय बना हुआ है, जिससे बारिश, बर्फबारी, तेज़ हवाएँ और गरज‑चमक की घटनाएँ सामने आ रही हैं। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने इन इलाकों के लिए Yellow Alert जारी किया है।

Uttarakhand Weather Update 5 April 2026

उत्तराखंड के केदारनाथ‑बद्रीनाथ समेत ऊँचे पर्वतीय क्षेत्रों में आज सुबह से भारी बर्फबारी और बारिश हो रही है। मौसम विभाग के अनुसार इन क्षेत्रों में गरज‑चमक के साथ तूफानी हालात बने हुए हैं। उच्च पर्वतीय जिलों‑ उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग, बागेश्वर और पिथौरागढ़ में गरज‑चमक के साथ बौछारें पड़ने की संभावना है। इन जिलों में कई जगहों पर जोरदार बारिश शुरू हो चुकी है। देहरादून, हरिद्वार, नैनीताल, हल्द्वानी और ऋषिकेश जैसे मैदानी इलाकों में भी बादल छाए हुए हैं और बारिश के साथ तेज़ हवाएँ चल रही हैं — जिससे मौसम पिछले दिनों की गर्मी से पूरी तरह बदल गया है।आगे पढ़िए..

पश्चिमी विक्षोभ का प्रभाव

IMD के अनुसार, 6–7 अप्रैल के आसपास मौसम में कुछ सुधार की संभावना है, लेकिन पश्चिमी विक्षोभ का प्रभाव अगले कुछ दिनों तक बना रह सकता है, जिससे उत्तर भारत में बारिश‑तूफान जैसी स्थितियाँ जारी रह सकती हैं। मौसम विभाग ने कहा है कि यह वातावरण पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के प्रभाव के कारण है, जो उत्तर भारत के मौसम को अस्थिर बना रहा है। उत्तराखंड में आगामी 10 अप्रैल तक मौसम इसी तरह बने रहने की संभावना है।

सावधानियाँ बरतने की अपील

मौसम विभाग ने लोगों और पर्यटकों से सावधानियाँ बरतने की अपील की है। पहाड़ी मार्गों पर भूस्खलन और पत्थर गिरने का खतरा बढ़ा है। ऊँचे इलाकों में यात्रा के दौरान मौसम अपडेट लगातार चेक करें। गरज‑चमक और तेज़ हवाओं के दौरान बाहरी गतिविधियाँ सीमित रखें। फसलों को नुकसान पहुँचने की आशंका है, इसलिए कृषि कार्य मौसम सुधार के बाद करें।