उत्तराखंड के बाजपुर क्षेत्र में सेमलपुरी गांव का जनजाति भूमि विवाद अब गंभीर रूप ले चुका है। किसानों और जनजाति परिवार के बीच टकराव बढ़ गया है। किसानों ने धरना-प्रदर्शन करते हुए आत्मदाह की चेतावनी दी, जिससे प्रशासन में हड़कंप मच गया।
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राज्य समीक्षा डेस्क
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Image: Farmer family opens front against BJP MLA
उधमसिंह नगर: उत्तराखंड के बाजपुर क्षेत्र के ग्राम सेमलपुरी में जनजाति भूमि विवाद अब बड़ा मुद्दा बन गया है। वर्तमान में जमीन पर काबिज किसान परिवार और किसान संगठनों ने अरविंद पांडेय के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
Farmer family opens front against BJP MLA
जानकारी के अनुसार बीते गुरुवार को किसान संगठन और प्रभावित परिवार एसडीएम कार्यालय पहुंचे, जहां उन्होंने जोरदार धरना-प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने हंगामा करते हुए कार्यालय में ताला लगाने का भी प्रयास किया, लेकिन पुलिस ने समय रहते उन्हें रोक लिया। इस दौरान भारी पुलिस बल तैनात रहा। पीड़ित किसान ने न्याय न मिलने पर परिवार सहित आत्मदाह की चेतावनी भी दी, जिससे प्रशासन में हड़कंप मच गया। स्थिति को संभालने के लिए सीओ विभव सैनी और कोतवाल नरेश चौहान मौके पर पहुंचे और प्रदर्शनकारियों से बातचीत की। एडीएम से फोन पर वार्ता के बाद कार्रवाई का आश्वासन मिलने पर मामला शांत हुआ। इसके बाद मक्खन सिंह ने मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन एसडीएम डॉ. अमृता शर्मा को सौंपा। ज्ञापन में बताया गया कि उन्होंने वर्ष 2022 में ग्राम सेमलपुरी बाजपुर में 3 एकड़ 15 डिस्मिल भूमि खरीदी थी। यह भूमि गुरविंदर सिंह के माध्यम से खरीदी गई थी, जिन्होंने इसे पहले अतुल पांडेय से खरीदा था।
जमीन के स्वामित्व को लेकर गंभीर आरोप
अब यह आरोप सामने आया है कि यह जमीन वर्ष 2011 में अतुल पांडेय द्वारा गलत तरीके से बुक्सा जनजाति से अपने नाम करवाई गई थी। इसके बाद वर्तमान में जमीन का नाम फिर से जनजाति के नाम दर्ज करा दिया गया, जिससे खरीदार किसान परिवार मुश्किल में आ गया है। पीड़ित परिवार का कहना है कि उन्होंने पूरी रकम देकर वैध तरीके से जमीन खरीदी थी, इसलिए उन्हें न्याय मिलना चाहिए।
दूसरी ओर बुक्सा जनजाति परिवार का दावा है कि यह जमीन उनकी पैतृक संपत्ति है और कानून के अनुसार इसे किसी गैर-जनजाति व्यक्ति को नहीं बेचा जा सकता। उनका आरोप है कि 2010-11 में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर यह जमीन अतुल कुमार के नाम पर कराई गई। परिवार का कहना है कि न्यायालय से फैसला उनके पक्ष में आने के बावजूद उन्हें अब तक जमीन पर कब्जा नहीं मिल पाया है। आगे पढ़िए..
किसान परिवार का दावा और मांग
वर्तमान में भूमि पर काबिज किसान मक्खन सिंह का कहना है कि उन्होंने दिसंबर 2022 में यह जमीन वैध रूप से खरीदी थी। खरीद के समय सभी सरकारी अधिकारियों ने जमीन को विवाद रहित बताया था और उनके नाम दाखिल-खारिज भी हो चुका है। इतना ही नहीं, उन्हें बैंक से लोन भी मिल चुका है। किसानों ने मांग की है कि या तो जमीन उनके नाम पर बहाल की जाए या फिर वर्तमान बाजार मूल्य के अनुसार उन्हें पूरी राशि वापस दी जाए। साथ ही उन्होंने सुरक्षा की भी मांग की है। इस पूरे विवाद में प्रशासन के सामने संतुलन बनाए रखना कठिन हो गया है। एक तरफ जनजाति परिवार अपने अधिकारों की मांग कर रहा है, तो दूसरी ओर किसान परिवार अपनी वैध खरीद का दावा कर रहा है। लगातार विरोध और आत्मदाह की चेतावनी के चलते क्षेत्र में तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है।
वक्फ और प्रभावशाली लोगों पर सवाल
गूलरभोज नगर पंचायत के चेयरमैन सतीश चुघ ने इस मामले में सवाल उठाते हुए कहा कि आखिर जनजाति की जमीन अपने नाम कराने वाले लोग कौन हैं। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की और आरोप लगाया कि प्रभावशाली लोगों ने दबाव बनाकर जमीन अपने नाम कराई।
40 दिन की मासूम भी पहुंची धरने पर
धरना-प्रदर्शन के दौरान भावुक दृश्य भी देखने को मिला। मक्खन सिंह का पूरा परिवार, जिसमें उनकी 40 दिन की नवजात बच्ची भी शामिल थी, न्याय की मांग को लेकर वहां मौजूद रहा। इस दौरान उनकी माता रजिंदर कौर अचानक बेहोश हो गईं, जिससे माहौल और अधिक संवेदनशील हो गया। परिवार ने कहा कि इस जमीन से उनकी बेटियों का भविष्य जुड़ा है और वे इसे किसी भी कीमत पर खोना नहीं चाहते।
यह मामला अब प्रशासन, कानून और सामाजिक संतुलन की कसौटी बन गया है। जांच जारी है और सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी कर दी गई है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस जटिल भूमि विवाद का समाधान किस तरह निकाला जाता है।