Dehradun में एयर अटैक की काल्पनिक स्थिति पर मॉक ड्रिल आयोजित की गई, जिसमें 30 मिनट का ब्लैकआउट किया गया। प्रशासन और नागरिकों ने मिलकर आपातकालीन तैयारी का सफल अभ्यास किया।
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राज्य समीक्षा डेस्क
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Image: Dehradun City Goes Dark During Mock Air Attack Exercise
देहरादून: शुक्रवार रात 10 बजे सायरन बजते ही Dehradun का बड़ा हिस्सा अचानक अंधेरे में डूब गया। बाजारों की चमक गायब हो गई, घरों की लाइटें बंद हो गईं और सड़कों पर आवाजाही धीमी पड़ गई। हालांकि यह कोई वास्तविक खतरा नहीं था, बल्कि एयर अटैक की काल्पनिक सूचना पर आयोजित एक मॉक ड्रिल थी। इस दौरान शहरवासियों ने अनुशासन का परिचय देते हुए प्रशासन के निर्देशों का पालन किया।
Dehradun Blackout Drill: City Goes Dark During Mock Air Attack Exercise
देहरादून में अधिकांश इलाकों में लोगों ने स्वेच्छा से निर्धारित 30 मिनट के ब्लैकआउट के दौरान बिजली बंद रखी। घंटाघर, आईएसबीटी और आराघर जैसे प्रमुख क्षेत्रों में भी नागरिकों ने जिम्मेदारी दिखाते हुए लाइटें बंद कर दीं। दुकानदारों ने तुरंत शटर गिरा दिए और वाहन चालकों ने भी अनावश्यक आवाजाही से परहेज किया, जिससे मॉक ड्रिल सफल रही। रात 10:05 बजे पुलिस कंट्रोल रूम से एयर अटैक की सूचना मिलते ही जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र सक्रिय हो गया। इंसिडेंट रिस्पांस सिस्टम (IRS) लागू किया गया और वायरलेस, मोबाइल व हॉटलाइन के जरिए सभी विभागों के बीच संपर्क बनाए रखा गया। प्रशासन की तत्परता इस अभ्यास के दौरान साफ दिखाई दी।
अलग-अलग स्थानों पर बनाए गए हादसे के दृश्य
मॉक ड्रिल के तहत शहर के कई हिस्सों में आपदा के अलग-अलग परिदृश्य तैयार किए गए। आईएसबीटी क्षेत्र में बम धमाके का दृश्य दिखाया गया, जिसमें चार मृतक, छह गंभीर घायल और पांच सामान्य घायल बताए गए। घायलों को एंबुलेंस से अस्पताल पहुंचाकर चिकित्सा व्यवस्था की तैयारी को परखा गया। आराघर क्षेत्र में बम गिरने की सूचना दी गई, लेकिन विस्फोट नहीं हुआ। मौके पर पहुंची ईओडी टीम ने बम को सुरक्षित तरीके से निष्क्रिय किया। वहीं घंटाघर क्षेत्र में बमबारी से पुलिया क्षतिग्रस्त होने और बिजली-पानी की आपूर्ति बाधित होने का परिदृश्य बनाया गया, जिसे संबंधित विभागों ने मौके पर पहुंचकर बहाल करने का अभ्यास किया। इस मॉक ड्रिल में सेना, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पुलिस और प्रशासन की संयुक्त टीमों ने भाग लिया। सभी टीमों ने मिलकर राहत और बचाव कार्यों का अभ्यास किया और आपात स्थिति में तेजी से प्रतिक्रिया देने की क्षमता का प्रदर्शन किया। आगे पढ़िए..
सिविल डिफेंस वॉलंटियर्स की अहम भूमिका
जिलाधिकारी Savin Bansal के अनुसार, चारों स्थानों पर कुल 152 सिविल डिफेंस वॉलंटियर्स तैनात किए गए थे। इनमें घंटाघर और आराघर में 52-52, आईएसबीटी में 36 और डी.एल. रायपुर में 12 वॉलंटियर मौजूद रहे। इनकी जिम्मेदारी लोगों को सतर्क करना और राहत कार्यों में सहयोग देना रही।
मॉक ड्रिल का उद्देश्य और निष्कर्ष
प्रशासन के अनुसार यह अभ्यास भारत सरकार के निर्देशों के तहत आयोजित किया गया था। इसका उद्देश्य नागरिक सुरक्षा तंत्र को मजबूत करना, विभागों के बीच समन्वय बढ़ाना और आपात स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करना था। इस पूरे अभ्यास ने यह साबित कर दिया कि अगर प्रशासन और नागरिक मिलकर काम करें, तो किसी भी आपदा का प्रभावी ढंग से सामना किया जा सकता है।