Champawat minor girl misbehavior: देहरादून के लैंसडौन चौक, श्रीनगर गढ़वाल के पीपलचौरी, बागेश्वर के एसबीआई तिराहे से लेकर अल्मोड़ा, चंपावत में विरोध प्रदर्शन देखने को मिल रहे हैं।
Advertisement
Triyuginarayan - World’s Most Divine Wedding Destination
Couples are choosing the sacred land of Lord Shiva’s wedding to begin their own love stories.
Example Ads Media
Image: Minor misbehavior in Champawat protests erupt across Uttarakhand
चम्पावत: चंपावत में नाबालिग छात्रा से गैंगरेप की खबर ने पूरे उत्तराखंड को स्तब्ध कर दिया। इसके विरोध में गुरुवार को कई जगह विरोध प्रदर्शन हुए। देहरादून के लैंसडौन चौक, श्रीनगर गढ़वाल के पीपलचौरी, बागेश्वर के एसबीआई तिराहे से लेकर अल्मोड़ा, चंपावत में विरोध प्रदर्शन देखने को मिल रहे हैं। हर जगह चंपावत की निर्भया के लिए इंसाफ की मांग की जा रही है। खासतौर पर कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर मुखर हो गई है। इस घटना को बेहद शर्मनाक बताते हुए आरोपियों को सख्त से सख्त सजा देने की मांग की गई। आपको बता दें कि चंपावत में 16 साल की नाबालिग बच्ची को हवस का शिकार बनाया गया। पीड़िता के पिता ने बताया कि शादी के बाद उन्हें लंबे समय तक संतान सुख नहीं मिला। उन्होंने वर्षों तक मन्नतें मांगीं और आखिरकार 52 वर्ष की उम्र में उन्हें एक बेटी का आशीर्वाद मिला। यही बेटी उनके जीवन की सबसे बड़ी खुशी बन गई। लेकिन किस्मत ने एक और बड़ा झटका तब दिया जब बच्ची महज छह महीने की थी और उसकी मां का बीमारी के चलते निधन हो गया। इसके बाद पिता ने अकेले ही बेटी को पाला-पोसा, उसे हर मुश्किल से बचाया और उसकी पढ़ाई-लिखाई का पूरा जिम्मा उठाया। आगे पढ़िए..
समय के साथ बेटी बड़ी हुई और कक्षा 10वीं में पढ़ाई करने लगी। इसी बीच 70 वर्षीय पिता की तबीयत बिगड़ गई और वह कमर के नीचे से चलने-फिरने में असमर्थ हो गए। ऐसे में बेटी ने ही हिम्मत दिखाई और उन्हें गांव से चंपावत शहर ले आई। वहां किराए पर कमरा लेकर खुद पढ़ाई के साथ-साथ एक दुकान पर काम करने लगी, ताकि घर का खर्च और पिता का इलाज चल सके। एक बेटी, जो खुद अभी नाबालिग थी, अपने पिता के लिए सहारा बनकर खड़ी थी। इसी बीच वह अपनी एक दोस्त की मेहंदी रस्म में शामिल होने के लिए जिला मुख्यालय से करीब 20 किलोमीटर दूर गांव गई थी। लेकिन किसी को अंदाजा भी नहीं था कि यह खुशी का मौका एक भयानक हादसे में बदल जाएगा। आरोप है कि भाजपा के मंडल उपाध्यक्ष एवं पूर्व प्रधान समेत तीन लोगों—पूरन सिंह रावत, नवीन सिंह और विनोद सिंह रावत—ने मिलकर इस जघन्य अपराध को अंजाम दिया। यह घटना न केवल कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है, बल्कि समाज के लिए भी एक गंभीर चेतावनी है।