चंपावत के कथित नाबालिग गैंगरेप साजिश मामले में छात्रा के पिता की शिकायत पर दूसरी FIR दर्ज हुई है। पुलिस ने 3 लोगों के खिलाफ पोक्सो एक्ट और बीएनएस की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया है।
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राज्य समीक्षा डेस्क
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Image: Second FIR Registered in Alleged Minor Gangrape Conspiracy Case in Champawat
चम्पावत: चंपावत के चर्चित नाबालिग छात्रा मामले में अब नया मोड़ आ गया है। छात्रा के पिता की तहरीर पर पुलिस ने दूसरी प्राथमिकी दर्ज करते हुए भाजपा के पूर्व मंडल अध्यक्ष कमल रावत, उनकी महिला मित्र अर्जिता राय और कांग्रेस के प्रदेश सचिव आनंद सिंह माहरा के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और पोक्सो एक्ट की गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है।
Second FIR Registered in Alleged Minor Gangrape Conspiracy Case in Champawat
जानकारी के अनुसार पांच मई की रात दसवीं कक्षा में पढ़ने वाली 16 वर्षीय छात्रा के साथ सामूहिक दुष्कर्म की साजिश रची गई थी। मामले में छह मई को छात्रा के बुजुर्ग पिता की तहरीर पर पुलिस ने सल्ली निवासी विनोद रावत, नवीन रावत और भाजपा के पूर्व मंडल उपाध्यक्ष पूरन रावत के खिलाफ सामूहिक दुष्कर्म, मारपीट, धमकी और पोक्सो एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज की थी।
जांच में मामला निकला फर्जी
पुलिस ने जब मामले की जांच तेज की तो पूरा मामला संदिग्ध और कथित तौर पर फर्जी पाया गया। जांच में सामने आया कि निर्दोष लोगों को झूठे मुकदमे में फंसाने की साजिश रची गई थी। इसके बाद आठ मई को विनोद रावत के पिता राम सिंह की तहरीर पर कमल सिंह रावत, उसकी महिला मित्र अर्जिता राय और आनंद सिंह माहरा के खिलाफ पोक्सो एक्ट, आईटी एक्ट, सेंधमारी, जान से मारने की धमकी देने समेत कई गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया।
छात्रा के पिता ने भी दी नई तहरीर
मंगलवार को छात्रा के पिता ने भी कमल रावत, अर्जिता राय और आनंद माहरा के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए नई तहरीर दी। इसके बाद पुलिस ने दूसरी प्राथमिकी दर्ज की। सीओ देवेंद्र सिंह ने बताया कि मामले की जांच जारी है और जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। आगे पढ़िए..
इन धाराओं में दर्ज हुआ मुकदमा
पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ पोक्सो एक्ट और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है।धारा 11 और 12 : किसी नाबालिग के साथ यौन इरादे से अभद्र भाषा, इशारे करना या अश्लील सामग्री दिखाना।
धारा 22 : बच्चों के विरुद्ध यौन अपराध करने के लिए उकसाना या उसमें मदद करना।
धारा 23 : पीड़ित की पहचान उजागर करना।
भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराएं
धारा 61(2) : दो या अधिक लोगों का किसी अवैध कार्य के लिए आपसी साजिश करना।
धारा 217 : लोक सेवक को गलत जानकारी देना ताकि वे अपनी शक्तियों का गलत इस्तेमाल करें।
धारा 230 : अपराध की जानकारी होने के बावजूद सूचना न देना।
धारा 351 : डराना-धमकाना।
धारा 353 : ऐसी अफवाह या झूठी खबर फैलाना जिससे सामाजिक या धार्मिक सौहार्द बिगड़े।
पुलिस कर रही मामले की गहन जांच
पुलिस का कहना है कि पूरे मामले की तकनीकी और वैज्ञानिक तरीके से जांच की जा रही है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए हर पहलू पर बारीकी से पड़ताल की जा रही है, ताकि किसी निर्दोष को नुकसान न पहुंचे और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सके।