उत्तराखंड में बढ़ते मानव-वन्यजीव संघर्ष को देखते हुए वन विभाग ने 13 गुलदार और 3 भालुओं को मारने के आदेश जारी किए हैं। पिछले सात महीनों में 118 खतरनाक वन्यजीव चिन्हित किए गए हैं। जानिए क्या है पूरा मामला और पिछले 10 वर्षों के आंकड़े।
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राज्य समीक्षा डेस्क
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Image: Uttarakhand Orders Action Against Dangerous Leopards and Bears
पौड़ी गढ़वाल: उत्तराखंड में लगातार बढ़ रहे मानव-वन्यजीव संघर्ष को देखते हुए वन विभाग ने बड़ा फैसला लिया है। विभाग ने 13 गुलदार और 3 भालुओं को मारने के आदेश जारी किए हैं। वहीं, 21 बाघों को पकड़ने के निर्देश दिए गए हैं।
Uttarakhand Orders Action Against Dangerous Leopards and Bears
वन विभाग का कहना है कि ये सभी ऐसे वन्यजीव हैं, जो बार-बार आबादी वाले क्षेत्रों में पहुंचकर लोगों की जान के लिए खतरा बन रहे हैं और कई मामलों में जानलेवा हमलों में शामिल रहे हैं। हालांकि, अब तक केवल पौड़ी जिले में एक गुलदार को ही मार गिराया जा सका है।
सात महीनों में 118 खतरनाक वन्यजीव चिन्हित
वन विभाग के अनुसार, वर्ष 2026 के पहले सात महीनों में 118 खतरनाक वन्यजीवों की पहचान की गई है। इनमें 90 गुलदार, 21 बाघ और 8 भालू शामिल हैं। विभाग ने बताया कि बाघों को मारने के बजाय उन्हें पकड़ने के निर्देश दिए गए हैं, जबकि जिन गुलदारों और भालुओं को मारने की अनुमति दी गई है, उनके खिलाफ पहले सभी वैकल्पिक उपाय अपनाए जा चुके हैं।
अंतिम विकल्प के रूप में दिया जाता है मारने का आदेश
वन अधिकारियों का कहना है कि किसी भी वन्यजीव को मारने का निर्णय अंतिम विकल्प होता है। पहले उसे पकड़ने, रेस्क्यू करने या आबादी वाले क्षेत्र से दूर खदेड़ने की कोशिश की जाती है। जब सभी प्रयास विफल हो जाते हैं और मानव जीवन पर लगातार खतरा बना रहता है, तभी मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक (Chief Wildlife Warden) की अनुमति से कार्रवाई की जाती है।
बढ़ रहा है मानव-वन्यजीव संघर्ष
पिछले कुछ वर्षों में उत्तराखंड के पहाड़ी और तराई क्षेत्रों में गुलदार, बाघ और भालुओं की गतिविधियां आबादी वाले इलाकों की ओर बढ़ी हैं। इसके चलते ग्रामीण क्षेत्रों में हमलों की घटनाओं में लगातार इजाफा हुआ है। वन विभाग का मानना है कि खतरनाक वन्यजीवों के खिलाफ समय पर कार्रवाई करने से लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी और मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं में कमी आएगी।
पिछले 10 वर्षों में 327 लोगों की मौत
वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक दशक में उत्तराखंड में बाघ और गुलदार के हमलों में 327 लोगों की जान जा चुकी है। वर्ष 2015 में बाघ के हमलों में 2 और गुलदार के हमलों में 26 लोगों की मौत हुई। वर्ष 2016 में यह संख्या क्रमशः 4 और 23 रही, जबकि 2017 में बाघ के हमलों में 7 और गुलदार के हमलों में 9 लोगों की जान गई। वर्ष 2018 में बाघ के हमलों में 6 और गुलदार के हमलों में 15, वर्ष 2019 में 3 और 18 तथा वर्ष 2020 में 1 और 30 लोगों की मौत दर्ज की गई। इसके बाद वर्ष 2021 में बाघ के हमलों में 2 और गुलदार के हमलों में 23, वर्ष 2022 में 16 और 22, वर्ष 2023 में 17 और 18, वर्ष 2024 में 12 और 15 तथा वर्ष 2025 में 12 और 18 लोगों की जान गई। वहीं, वर्ष 2026 में अब तक बाघ के हमलों में 12 और गुलदार के हमलों में 16 लोगों की मौत हो चुकी है। ये आंकड़े बताते हैं कि पिछले एक दशक में गुलदार के हमले सबसे अधिक जानलेवा रहे हैं, जबकि हाल के वर्षों में बाघों के हमलों में भी उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिली है।
लोगों से सतर्क रहने की अपील
वन विभाग ने लोगों से जंगलों के आसपास विशेष सतर्कता बरतने, अकेले जंगल या खेतों में न जाने और किसी भी वन्यजीव की गतिविधि दिखाई देने पर तुरंत वन विभाग को सूचना देने की अपील की है।