उत्तराखंड में मदरसा बोर्ड खत्म होने के बाद नई मान्यता प्रक्रिया शुरू हुई है। 452 मदरसों में अब तक सिर्फ 7 को शिक्षा विभाग और अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की मान्यता मिली है। 30 सितंबर के बाद कार्रवाई की तैयारी है।
-
राज्य समीक्षा डेस्क
-
Advertisement
ऋषियों का मार्ग: केदार हिमालय के इन ट्रेक्स पर शोर नहीं, सिर्फ मंत्र सुनाई देते हैं
प्रकृति से जुड़ने और आत्मिक शांति पाने का अवसर। केदार हिमालय की वो यात्राएं जो ज़िंदगी भर याद रहती हैं।
Example Ads Media
Image: Only 7 of 452 Madrasas Get Approval in Uttarakhand
देहरादून: उत्तराखंड में अल्पसंख्यक बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने की सरकार की योजना को शुरुआती स्तर पर झटका लगता दिखाई दे रहा है। 1 जुलाई को मदरसा बोर्ड खत्म होने के बाद गठित राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के तहत नई मान्यता प्रक्रिया शुरू की गई है, लेकिन एक महीने से अधिक समय बीतने के बाद भी राज्य के 452 मदरसों में से सिर्फ 7 मदरसों को शिक्षा विभाग और प्राधिकरण की मान्यता मिल सकी है।
Uttarakhand: Only 7 of 452 Madrasas Get Approval
देहरादून के जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी की ओर से प्राधिकरण को सौंपी गई जांच रिपोर्ट में सामने आया है कि कई मदरसों ने अभी तक मान्यता के लिए जरूरी मानक पूरे नहीं किए हैं। कुछ मदरसों ने जांच टीम को जानकारी देने से भी इनकार किया है, जबकि कुछ ने स्पष्ट रूप से कहा है कि वे शिक्षा विभाग और प्राधिकरण से मान्यता नहीं लेना चाहते। सरकार का उद्देश्य मदरसों में पढ़ने वाले बच्चों को विज्ञान, गणित और अन्य आधुनिक विषयों की शिक्षा से जोड़ना है। इसके साथ ही शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता लाकर अल्पसंख्यक समुदायों के शिक्षण संस्थानों को एक समान प्रशासनिक व्यवस्था के दायरे में लाने की योजना है। इस दायरे में मुस्लिम, सिख, जैन, बौद्ध, ईसाई और पारसी समुदायों के शिक्षण संस्थान शामिल हैं।
41 मान्यता प्राप्त मदरसों में भी कई ने पूरे नहीं किए मानक
मदरसा बोर्ड से पूर्व में मान्यता प्राप्त 41 मदरसों में से भी अधिकांश अभी तक नई व्यवस्था के मानकों को पूरा नहीं कर पाए हैं। कुछ मदरसों की ओर से मान्यता के लिए पत्रावली तैयार करने की बात कही जा रही है। आगे पढ़िए..
जांच रिपोर्ट के अनुसार, कुछ संस्थानों ने जांच टीम को आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराने से इनकार किया है, जबकि कुछ ने नई मान्यता लेने से ही साफ मना कर दिया है।
ऊधमसिंह नगर में सभी 11 आवेदन हुए खारिज
नई मान्यता प्रक्रिया में ऊधमसिंह नगर जिले से 11 मदरसों ने शिक्षा विभाग में आवेदन किया था। हालांकि निर्धारित मानक पूरे नहीं होने के कारण सभी 11 आवेदन निरस्त कर दिए गए। वहीं, हरिद्वार में आवेदन करने वाले 18 मदरसों में से 7 मदरसों को मान्यता मिल चुकी है। देहरादून और नैनीताल में मान्यता को लेकर अभी बैठक नहीं हुई है।
30 सितंबर के बाद होगी कार्रवाई
राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण ने मदरसों और अन्य अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को मान्यता के लिए तीन महीने का समय दिया है। यह समय सीमा 30 सितंबर को समाप्त होगी। प्राधिकरण के अध्यक्ष डॉ. सुरजीत सिंह गांधी के अनुसार, समय सीमा समाप्त होने के बाद मानक पूरे नहीं करने वाले संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई के लिए शासन को रिपोर्ट भेजी जाएगी। उन्होंने कहा कि संबंधित मदरसों के सामने मुख्य रूप से दो विकल्प होंगे—या तो निर्धारित मानकों के अनुसार मान्यता हासिल करें या फिर वहां पढ़ रहे बच्चों को दूसरे मान्यता प्राप्त शिक्षण संस्थानों में शिफ्ट करें। सरकार की नई व्यवस्था का उद्देश्य अल्पसंख्यक बच्चों को आधुनिक शिक्षा से जोड़ने के साथ-साथ शिक्षण संस्थानों की व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है।