उत्तराखंड: पहाड़ की बेटियों को कॉलेज जाने के लिए मुफ्त परिवहन का इंतजार, योजना अब तक अटकी

उत्तराखंड में सरकारी महाविद्यालयों की छात्राओं को मुफ्त परिवहन सुविधा देने की योजना अब तक लागू नहीं हुई है। प्रस्ताव कैबिनेट में आने का इंतजार है। जानिए पूरी खबर।
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Image: uttarakhand college girls free transport scheme cabinet

देहरादून: उत्तराखंड में उच्च शिक्षा हासिल करने वाली छात्राओं के लिए मुफ्त परिवहन सुविधा का इंतजार लंबा होता जा रहा है। सरकार ने पहाड़ी क्षेत्रों की छात्राओं को महाविद्यालय आने-जाने के लिए मुफ्त परिवहन सुविधा देने की योजना बनाई थी, लेकिन प्रस्ताव तैयार होने के बावजूद यह योजना अब तक धरातल पर नहीं उतर सकी है। ऐसे में दूरदराज के क्षेत्रों से कॉलेज आने वाली छात्राओं के सामने परिवहन खर्च और आवागमन की परेशानी बनी हुई है।

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उच्च शिक्षा विभाग ने महाविद्यालयों में छात्राओं की उपस्थिति बढ़ाने और आर्थिक एवं भौगोलिक बाधाओं के कारण उच्च शिक्षा से वंचित होने वाली बेटियों को राहत देने के उद्देश्य से मुफ्त परिवहन सुविधा का प्रस्ताव तैयार किया था। इसे गेम चेंजर योजना के तौर पर आगे बढ़ाने की बात कही गई थी।
शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने भी सरकारी महाविद्यालयों में पढ़ने वाली छात्राओं के परिवहन खर्च को सरकार की ओर से वहन किए जाने की बात कही थी। हालांकि, प्रस्ताव तैयार होने के बाद भी योजना को लागू करने की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई है।उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में कई महाविद्यालय ऐसे स्थानों पर हैं जहां छात्राओं को रोजाना लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। सार्वजनिक परिवहन की सीमित सुविधा और लगातार बढ़ते यात्रा खर्च के कारण कई छात्राओं के लिए नियमित रूप से कॉलेज पहुंचना मुश्किल हो जाता है। विभाग का मानना है कि यदि छात्राओं को मुफ्त परिवहन की सुविधा मिलती है तो उनकी कॉलेज में उपस्थिति बढ़ सकती है और आर्थिक कारणों से पढ़ाई छोड़ने की स्थिति में भी कमी आएगी।

पिछले साल से प्रस्ताव, अब कैबिनेट का इंतजार

मुफ्त परिवहन योजना को लेकर प्रस्ताव पिछले साल तैयार किए जाने की बात सामने आई थी, लेकिन अभी तक इसे कैबिनेट के समक्ष मंजूरी के लिए नहीं लाया जा सका है। आगे पढ़िए..

सचिव उच्च शिक्षा डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम के अनुसार, छात्राओं को मुफ्त परिवहन सुविधा देने के संबंध में प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। इसे कैबिनेट में लाया जाएगा। इसके बाद ही योजना को लागू करने की दिशा में आगे की प्रक्रिया शुरू होगी।

उत्तराखंड में 118 सरकारी महाविद्यालय

प्रदेश में उच्च शिक्षा का बड़ा नेटवर्क है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार उत्तराखंड में 5 राज्य विश्वविद्यालय, 26 निजी विश्वविद्यालय, 118 सरकारी महाविद्यालय, 244 निजी महाविद्यालय और 21 सहायता प्राप्त महाविद्यालय हैं। सरकारी महाविद्यालयों में पढ़ने वाली बड़ी संख्या में छात्राओं को मुफ्त परिवहन सुविधा का लाभ मिलने की उम्मीद है, खासकर पर्वतीय क्षेत्रों में जहां आवागमन की समस्या अधिक गंभीर है।

नौवीं की छात्राओं को पहले से मिल रही साइकिल की सुविधा

सरकार स्कूली स्तर पर छात्राओं को आवागमन में राहत देने के लिए पहले से योजना चला रही है। सरकारी और अशासकीय विद्यालयों में कक्षा नौ में पढ़ने वाली छात्राओं को मुफ्त साइकिल दी जा रही है। मैदानी क्षेत्रों के विद्यालयों में छात्राओं के बैंक खातों में 2,850 रुपये की राशि दी जाती है, जबकि पर्वतीय क्षेत्रों के विद्यालयों में पढ़ने वाली छात्राओं को इतनी ही राशि की बैंक एफडी दिए जाने का प्रावधान है। अब निगाहें उच्च शिक्षा विभाग की उस प्रस्तावित योजना पर हैं, जिसके तहत सरकारी महाविद्यालयों में पढ़ने वाली छात्राओं को भी मुफ्त परिवहन सुविधा मिल सकती है।

कैबिनेट मंजूरी के बाद साफ होगी योजना की तस्वीर

फिलहाल छात्राओं को योजना के लागू होने का इंतजार है। प्रस्ताव कैबिनेट में आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि मुफ्त परिवहन की सुविधा किन छात्राओं को मिलेगी, इसका संचालन किस माध्यम से होगा और सरकार इसके लिए कितना बजट उपलब्ध कराएगी। अगर योजना जल्द लागू होती है तो पहाड़ की उन बेटियों के लिए बड़ी राहत साबित हो सकती है, जो परिवहन की समस्या के बावजूद उच्च शिक्षा जारी रखने की कोशिश कर रही हैं।