Haridwar News: संत समागम में स्वामी रामदेव ने कंगना रनौत के बयान पर बिना नाम लिए पलटवार किया। उन्होंने वन नेशन-वन इलेक्शन, वंदे मातरम और सामाजिक समरसता पर भी अपनी बात रखी।
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राज्य समीक्षा डेस्क
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Image: Ramdev Hits Back at Kangana
हरिद्वार: जनपद हरिद्वार में आयोजित संत समागम में योग गुरु स्वामी रामदेव ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ पर संवाद कार्यक्रम में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने देश में एक साथ चुनाव कराने के प्रस्ताव से लेकर राष्ट्रीय एकता और सामाजिक समरसता जैसे मुद्दों पर अपनी बात रखी। रामदेव ने कहा कि वन नेशन-वन इलेक्शन लागू होने से देश में बार-बार होने वाले चुनावों से होने वाली गतिविधियों और व्यवधान में कमी आ सकती है। इसका असर शिक्षा और विकास के कार्यों पर भी पड़ने की बात उन्होंने कही।
Ramdev Hits Back at Kangana, Speaks on One Nation One Election
संवाद कार्यक्रम के दौरान मीडिया ने रामदेव से भाजपा नेता कंगना रनौत के साथ चल रही जुबानी जंग को लेकर सवाल किया। जवाब में रामदेव ने बिना नाम लिए कहा कि वह विवाद को आगे नहीं बढ़ाना चाहते। उन्होंने अपने योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि देश स्वामी रामदेव को और उनके योगदान को जानता है। उन्होंने संबंधित लोगों पर टिप्पणी करने से इनकार करते हुए कहा कि वह “ओछे लोगों” पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहते।
सरकारी नौकरी में इंटरव्यू को लेकर शुरू हुआ था विवाद
दरअसल, कुछ दिन पहले रामदेव ने सरकारी नौकरियों के इंटरव्यू में कथित गड़बड़ियों को लेकर सवाल उठाए थे। उन्होंने इस मुद्दे पर आंदोलन की चेतावनी भी दी थी। इसके बाद कंगना रनौत ने रामदेव के आंदोलन संबंधी बयान पर तंज कसा था। इसके बाद दोनों के बीच बयानबाजी का सिलसिला शुरू हुआ। अब हरिद्वार में मीडिया के सवालों पर रामदेव ने इस मामले पर फिर प्रतिक्रिया दी है। अगले पढ़िए..
शिक्षा और विकास में बदलाव की बात
रामदेव ने एक साथ चुनाव कराने की व्यवस्था को लेकर कहा कि इसका असर देश के विकास और शिक्षा व्यवस्था पर भी पड़ सकता है। उनके अनुसार, लगातार चुनावी प्रक्रिया में रहने के बजाय यदि चुनाव एक साथ कराए जाते हैं तो सरकारों को विकास और अन्य महत्वपूर्ण कार्यों पर ज्यादा ध्यान देने का अवसर मिल सकता है।
‘वंदे मातरम’ के अर्थ पर भी बोले रामदेव
संत समागम में रामदेव ने ‘वंदे मातरम’ के अर्थ और महत्व को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि ‘वंदे मातरम’ का अर्थ भारत माता को नमन करना है और इसे किसी विशेष देवी-देवता, मंदिर या मठ की पूजा से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। रामदेव के अनुसार, भारत माता ही देशवासियों के लिए शक्ति, विद्या, धर्म और सर्वस्व का प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि भारत माता को इन रूपकों से विभूषित करना राष्ट्र के प्रति समर्पण का भाव है।
सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकता पर जोर
रामदेव ने समाज में भेदभाव और आपसी फूट को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि किसी भी वर्ग के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए। उन्होंने छात्रों, मरीजों, जवानों, किसानों, अनुसूचित जाति-जनजाति और ब्राह्मणों समेत सभी वर्गों के सम्मान की बात कही। उनके मुताबिक किसी भी व्यक्ति या वर्ग का अपमान संविधान और लोकतंत्र की भावना के अनुरूप नहीं है। रामदेव ने संन्यासियों को लेकर की जाने वाली कथित अपमानजनक टिप्पणियों पर भी चिंता जताई और सामाजिक सम्मान बनाए रखने पर जोर दिया।