उत्तराखंड: पहाड़ में विकास की ये कैसी तस्वीर? 80 साल के बुजुर्ग को डंडे पर लादकर पहुंचाया अस्पताल

Champawat News: बकोड़ा गांव में सड़क नहीं होने पर 80 वर्षीय बुजुर्ग को ग्रामीणों ने बारिश के बीच डंडे के सहारे 8 KM पैदल सड़क तक पहुंचाया। 2012 से ग्रामीण सड़क का इंतजार कर रहे हैं।
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Champawat Road Problem: 80-Year-Old Man Carried 8 KM Due to No Road
Image: 80-Year-Old Man Carried 8 KM Due to No Road

चम्पावत: जनपद चंपावत के दूरस्थ इलाकों में सड़क की समस्या ग्रामीणों के लिए आज भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। इसका ताजा उदाहरण तल्लादेश के बकोड़ा गांव से सामने आया है, जहां 80 वर्षीय दीवान सिंह को इलाज के लिए सड़क तक पहुंचाने के लिए ग्रामीणों को करीब आठ किलोमीटर पैदल चलना पड़ा।

80-Year-Old Man Carried 8 KM Due to No Road

जानकारी के अनुसार 80 वर्षीय दीवान सिंह के पैर में कुछ चीज चुभ गई थी। चोट और दर्द बढ़ने के बाद उन्हें अस्पताल ले जाने की जरूरत पड़ी, लेकिन गांव तक सड़क नहीं होने के कारण ग्रामीणों के सामने उन्हें पैदल सड़क तक पहुंचाने के अलावा कोई विकल्प नहीं था। ग्रामीणों ने दीवान सिंह को एक डंडे के सहारे बांधकर कंधे पर उठाया और करीब 8 किलोमीटर का सफर पैदल तय किया। रवींद्र रावत, जगदीश सिंह, प्रियांशु और केदार समेत अन्य ग्रामीणों ने बारी-बारी से बुजुर्ग को कंधा दिया। लगातार बारिश के बीच इस मुश्किल सफर को पूरा करने में करीब दो घंटे लगे। सड़क तक पहुंचने के बाद वाहन की मदद से बुजुर्ग को करीब 35 किलोमीटर दूर टनकपुर उपजिला चिकित्सालय ले जाया गया। इस पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसके बाद एक बार फिर पहाड़ के दूरस्थ गांवों में सड़क और स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

2012 से सड़क का इंतजार कर रहे ग्रामीण

नेपाल सीमा से लगे बकोड़ा गांव के ग्रामीण लंबे समय से सड़क सुविधा की मांग कर रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार, वर्ष 2012 से गांव तक सड़क पहुंचने का इंतजार किया जा रहा है। सड़क नहीं होने के कारण किसी व्यक्ति के बीमार पड़ने या घायल होने पर उसे डोली, कंधे या डंडे के सहारे कई किलोमीटर पैदल सड़क तक पहुंचाना पड़ता है। ग्राम प्रधान रवींद्र रावत के अनुसार, सड़क बनने से अकेड़ी, मोस्टा, ग्वानी और बकोड़ा की 500 से अधिक आबादी को सीधा लाभ मिलेगा। उनका कहना है कि सड़क सुविधा के अभाव में क्षेत्र से पलायन भी बढ़ रहा है।

22.30 KM लंबी सड़क का प्रस्ताव भेजा गया

वहीं, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के अधिकारियों के अनुसार मंच-मोस्टा-बकोड़ा सड़क को लेकर प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है। मंच-मोस्टा-बकोड़ा सड़क की लंबाई 22.30 किलोमीटर प्रस्तावित है। इसकी डीपीआर तैयार कर 18.30 करोड़ रुपये की स्वीकृति के लिए भारत सरकार को भेजी गई है। अधिकारियों के अनुसार सड़क से संबंधित वन प्रस्ताव भी अपलोड कर दिया गया है। केंद्र से स्वीकृति मिलने के बाद सड़क निर्माण शुरू किया जाएगा।

सड़क के अभाव में मरीजों को उठाकर ले जाने की मजबूरी

बकोड़ा की यह तस्वीर सिर्फ एक बुजुर्ग की परेशानी नहीं है, बल्कि पहाड़ के उन दूरस्थ गांवों की वास्तविकता को सामने लाती है जहां आज भी सड़क तक पहुंचना ग्रामीणों के लिए चुनौती बना हुआ है। बीमार और बुजुर्ग लोगों को अस्पताल पहुंचाने के लिए ग्रामीणों को कई किलोमीटर तक पैदल चलना पड़ता है। बरसात के मौसम में यह समस्या और गंभीर हो जाती है।

गांव वालों की प्रमुख समस्याएं

गांव तक सड़क सुविधा नहीं
मरीजों को 8 किलोमीटर तक पैदल ले जाने की मजबूरी
बारिश में रास्ता और भी मुश्किल
अस्पताल पहुंचने में लंबा समय
सड़क के अभाव में पलायन की समस्या
2012 से सड़क का इंतजार

अब सवाल सड़क निर्माण कब शुरू होगा?

प्रशासन की ओर से प्रस्ताव और डीपीआर की प्रक्रिया पूरी होने की बात कही जा रही है, लेकिन ग्रामीणों की असली समस्या सड़क बनने के बाद ही दूर होगी। अब देखना होगा कि 22.30 किलोमीटर लंबी मंच-मोस्टा-बकोड़ा सड़क को केंद्र से मंजूरी कब मिलती है और निर्माण कार्य धरातल पर कब शुरू होता है। फिलहाल बकोड़ा के ग्रामीणों को मरीजों और घायलों को इसी तरह जोखिम उठाकर सड़क तक पहुंचाने की मजबूरी बनी हुई है।