औली में 10 हजार फीट की ऊंचाई पर भारत-अमेरिका के सैनिक ‘युद्ध अभ्यास-2026’ में आतंकवाद विरोधी अभियानों की ट्रेनिंग कर रहे हैं। बिल्डिंग क्लियरेंस और रूम इंटरवेंशन ड्रिल में ड्रोन, रोबोटिक डॉग, डॉग स्क्वाड और स्नाइपर की मदद से कार्रवाई का प्रदर्शन किया
-
राज्य समीक्षा डेस्क
-
Advertisement
ये ट्रेक्स गूगल मैप पर भी नहीं मिलेंगे! केदार हिमालय के छुपे हुए रास्ते
प्रकृति से जुड़ने और आत्मिक शांति पाने का अवसर। केदार हिमालय की वो यात्राएं जो ज़िंदगी भर याद रहती हैं।
Example Ads Media
Image: India-US Army Exercise 2026 Begins at 10 000 Feet in Auli
चमोली: उत्तराखंड के औली में करीब 10,000 फीट की ऊंचाई पर भारत और अमेरिका के सैनिक संयुक्त युद्धाभ्यास कर रहे हैं। ‘युद्ध अभ्यास-2026’ के तहत गुरुवार को दोनों देशों के सैनिकों ने आतंकवाद विरोधी अभियानों से जुड़ी संयुक्त ट्रेनिंग में हिस्सा लिया। इस दौरान बिल्डिंग क्लियरेंस और रूम इंटरवेंशन ड्रिल के जरिए आमने-सामने की लड़ाई जैसी परिस्थितियों में अभियान चलाने का अभ्यास किया गया।
India-US Army Exercise 2026 Begins at 10,000 Feet in Auli
संयुक्त ड्रिल के दौरान आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल भी देखने को मिला। सैनिकों ने ड्रोन, रोबोटिक डॉग, डॉग स्क्वाड और स्नाइपर की मदद से अभियान चलाने की तकनीक का प्रदर्शन किया। इस ट्रेनिंग का उद्देश्य अलग-अलग परिचालन परिस्थितियों में दोनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल और संयुक्त कार्रवाई की क्षमता विकसित करना है। यह संयुक्त सैन्य अभ्यास 28 सितंबर तक चलेगा।
भारत-अमेरिका युद्ध अभ्यास का 22वां संस्करण
भारत और अमेरिका के बीच होने वाले संयुक्त सैन्य अभ्यास का यह 22वां संस्करण है। इसका उद्घाटन 15 सितंबर को औली में किया गया था। इस बार अभ्यास उत्तराखंड के औली के साथ-साथ राजस्थान के महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में भी एक साथ आयोजित किया जा रहा है। दोनों स्थानों पर भारतीय और अमेरिकी सेना के करीब 600-600 सैन्यकर्मी हिस्सा ले रहे हैं। औली में पर्वतीय परिस्थितियों, जबकि महाजन में अर्ध-पर्वतीय और मैदानी परिस्थितियों में सैनिकों की संयुक्त क्षमताओं को परखा जा रहा है। आगे पढ़िए..
पर्वतीय युद्ध क्षमता पर खास फोकस
अभ्यास का मुख्य उद्देश्य पर्वतीय और अर्ध-पर्वतीय क्षेत्रों में एकीकृत युद्ध समूहों के इस्तेमाल के लिए दोनों सेनाओं की संयुक्त सैन्य क्षमता को बढ़ाना है। प्रशिक्षण में पैदल सेना आधारित अभियानों पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इस दौरान दोनों देशों के सैनिक एक-दूसरे की रणनीति, तकनीक और परिचालन प्रक्रियाओं को समझने के साथ-साथ संयुक्त योजना और अभियान संचालन का अभ्यास कर रहे हैं।
आधुनिक तकनीक बनी युद्ध अभ्यास का अहम हिस्सा
‘युद्ध अभ्यास-2026’ में आधुनिक तकनीक और स्वायत्त प्रणालियों को भी अहम भूमिका दी गई है। निगरानी और टोही के लिए ड्रोन तथा अन्य स्वायत्त प्रणालियों का इस्तेमाल किया जा रहा है। वहीं, महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में आधुनिक हथियार प्रणालियों का प्रदर्शन भी किया जा रहा है। दोनों देशों के सैन्य विशेषज्ञ उभरती तकनीकों और बहु-क्षेत्रीय युद्ध में हो रहे बदलावों को लेकर अपने अनुभव भी साझा कर रहे हैं।
भारतीय जवानों से अमेरिकी सैनिकों ने किया संवाद
गुरुवार को आयोजित ड्रिल के दौरान अमेरिकी सैनिकों ने भारतीय जवानों से संवाद किया और विभिन्न उपकरणों का अवलोकन किया। इस दौरान प्रदर्शित तकनीकों और सैन्य क्षमताओं को समझने के साथ दोनों सेनाओं के जवानों ने अपने अनुभव साझा किए। सेना के अनुसार, इस तरह के संयुक्त प्रशिक्षण से दोनों देशों की सेनाओं के बीच पेशेवर अनुभवों का आदान-प्रदान, रणनीतिक समझ और आपसी तालमेल बढ़ाने में मदद मिलेगी। साथ ही अलग-अलग भूभाग और परिचालन परिस्थितियों में संयुक्त सैन्य अभियान संचालित करने की क्षमता को भी मजबूती मिलेगी।