उत्तराखंड में अडानी पावर के 25 साल के करार पर कांग्रेस ने उठाए सवाल, धामी सरकार से मांगा जवाब

उत्तराखंड में अडानी पावर से 25 साल के बिजली खरीद समझौते को लेकर कांग्रेस ने धामी सरकार पर कई सवाल उठाए हैं। पवन खेड़ा ने टेंडर की 84 शर्तों में बदलाव समेत कई मुद्दों पर जवाब मांगा, जबकि सरकार इसे राज्य की दीर्घकालिक बिजली जरूरत से जोड़ रही है।
Advertisement Cheapest Chardham Yatra 2026 Package? The Price Will Shock You!

Planning Chardham in 2026? These 5 Packages Are Getting Booked Fast

Example Ads Media
Uttarakhand Adani Power Deal: Congress Questions Dhami Government Over Adani Power Deal
Image: Congress Questions Dhami Government Over Adani Power Deal

देहरादून: उत्तराखंड की राजनीति में 25 अगस्त को हुई धामी कैबिनेट बैठक में मंजूर किए गए Adani Power के 1,320 MW कोयला आधारित बिजली खरीद समझौते को लेकर सियासी गर्मी बढ़ गई है। कैबिनेट ने अडानी पावर से 25 साल तक बिजली खरीदने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। बिजली की दर ₹5.746 प्रति यूनिट तय की गई है और बिजली छत्तीसगढ़ में स्थापित होने वाले पावर प्लांट से उत्तराखंड को मिलने की बात सरकार की ओर से कही गई है।

Congress Questions Dhami Government Over Adani Power Deal

सरकार के मुताबिक, यह फैसला राज्य की long-term energy security और भरोसेमंद बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लिया गया है। UPCL को Adani Power के साथ Power Supply Agreement (PSA) करने और जरूरी नियामकीय प्रक्रिया पूरी करने के लिए अधिकृत किया गया है।
हालांकि, इस फैसले के बाद कांग्रेस ने धामी सरकार पर सवाल उठाए हैं। दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कांग्रेस प्रवक्ता Pawan Khera ने इस पूरे प्रोजेक्ट की प्रक्रिया और टेंडर की शर्तों को लेकर कई सवाल सामने रखे।

कांग्रेस ने टेंडर प्रक्रिया पर उठाए सवाल

पवन खेड़ा ने आरोप लगाया कि प्रोजेक्ट को लेकर टेंडर प्रक्रिया में कई बदलाव किए गए और 84 टेंडर शर्तों में बदलाव किए जाने पर स्पष्टीकरण मांगा। National Herald की रिपोर्ट के अनुसार, खेड़ा ने यह भी सवाल उठाया कि पहले प्रस्तावित UJVN-THDC प्रोजेक्ट को क्यों आगे नहीं बढ़ाया गया और बाद में 1,320 MW की बिजली खरीद के लिए नई प्रक्रिया क्यों अपनाई गई।

कांग्रेस की ओर से उठाए गए प्रमुख सवाल

UJVN-THDC के प्रस्तावित प्रोजेक्ट को क्यों खत्म किया गया?
टेंडर की 84 शर्तों में बदलाव क्यों किए गए?
क्या टेंडर की शर्तों से किसी एक कंपनी को फायदा पहुंचा?
पावर प्लांट को उत्तराखंड से बाहर स्थापित करने की अनुमति क्यों दी गई?
Adani Power के साथ 25 साल का Power Purchase Agreement क्यों किया गया? आगे पढ़िए..

इन सवालों पर कांग्रेस ने धामी सरकार से जवाब मांगा है। यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि ये कांग्रेस और पवन खेड़ा द्वारा उठाए गए राजनीतिक सवाल/आरोप हैं, जबकि सरकार का कहना है कि Adani Power टैरिफ आधारित प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया में lowest bidder यानी L1 रही और खरीद का उद्देश्य राज्य की दीर्घकालिक बिजली जरूरत पूरी करना है।

छत्तीसगढ़ में लगेगा पावर प्लांट

कैबिनेट के फैसले के अनुसार, Adani Power छत्तीसगढ़ में 1,320 MW क्षमता का प्लांट स्थापित करेगी। राज्य सरकार के अनुसार, छत्तीसगढ़ में उत्तराखंड को आवंटित कोल ब्लॉक मौजूद है और इसी क्षेत्र में बिजली उत्पादन की व्यवस्था की जा रही है। उत्तराखंड को वित्त वर्ष 2029-30 से बिजली मिलने की उम्मीद बताई गई है। कैबिनेट ने 25 साल के लिए बिजली खरीद की मंजूरी दी है। रिपोर्टों में 1,320 MW बिजली और करीब 1,234 MW की contracted capacity का उल्लेख है।

₹1.6 लाख करोड़ से ज्यादा के दावे पर भी सवाल

कांग्रेस ने इस समझौते की दीर्घकालिक वित्तीय लागत को लेकर भी सवाल उठाया है। पवन खेड़ा ने दावा किया कि 25 साल की अवधि में यह सौदा करीब ₹1.6 लाख करोड़ का हो सकता है। यह आंकड़ा कांग्रेस की ओर से उठाए गए सवालों के संदर्भ में है; इसे सरकार द्वारा घोषित कुल परियोजना लागत के रूप में नहीं लिखा जाना चाहिए।

2027 विधानसभा चुनाव से पहले गरमाई सियासत

उत्तराखंड में 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में लंबे समय के इस बिजली खरीद समझौते ने सरकार और विपक्ष के बीच राजनीतिक बहस को तेज कर दिया है। एक तरफ सरकार इस फैसले को राज्य की बढ़ती बिजली जरूरत और long-term power security से जोड़ रही है, वहीं कांग्रेस टेंडर प्रक्रिया, शर्तों में बदलाव और 25 साल के करार को लेकर सवाल उठा रही है। अब इस मामले में सरकार की ओर से कांग्रेस के आरोपों पर क्या जवाब आता है, इस पर नजर रहेगी।