उत्तराखंड: 18 देशों की पैदल यात्रा कर नैनीताल पहुंचे स्विट्जरलैंड के ‘वॉकिंग बाबा’, जानिए उनकी अनोखी कहानी

स्विट्जरलैंड के बेंजामिन वियात्ते उर्फ ‘वॉकिंग बाबा’ 18 देशों की यात्रा और करीब 14 हजार किलोमीटर पैदल सफर तय कर नैनीताल पहुंचे हैं। 30 और 31 अक्टूबर को आयोजित हिमालयन इकोज के 11वें संस्करण में साहित्य, कला, पर्यावरण और हिमालय की संस्कृति पर चर्चा होग
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बुग्याल, हिमालयी वन और बर्फीली चोटियों का अद्भुत नज़ारा। आध्यात्म, रोमांच और एकांत का अनोखा संगम।

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Walking Baba Benjamin Nainital: Walking Baba Reaches Nainital After 14000 KM Journey
Image: Walking Baba Reaches Nainital After 14000 KM Journey

नैनीताल: 18 देश, करीब 14 हजार किलोमीटर का पैदल सफर और मंजिल भारतीय हिमालय। स्विट्जरलैंड के बेंजामिन वियात्ते की यह अनूठी यात्रा इन दिनों चर्चा में है। दुनिया उन्हें ‘वॉकिंग बाबा’ और ‘बेन बाबा’ के नाम से जानती है। अलग-अलग देशों की संस्कृति, प्रकृति और जीवनशैली को करीब से समझने के उद्देश्य से पैदल विश्व यात्रा पर निकले बेंजामिन अब नैनीताल पहुंचे हैं।

Walking Baba Reaches Nainital After 14,000 KM Journey

आमतौर पर लोग अपनी मंजिल तक जल्दी पहुंचने के लिए रास्ता छोटा करने की कोशिश करते हैं, लेकिन बेंजामिन वियात्ते के लिए रास्ता ही उनकी यात्रा का सबसे अहम हिस्सा है। 18 देशों से गुजरते हुए करीब 14 हजार किलोमीटर पैदल चलकर भारतीय हिमालय तक पहुंचना उनके इसी जुनून को दर्शाता है। उनकी यात्रा केवल अलग-अलग जगहों को देखने तक सीमित नहीं है। वह रास्ते में मिलने वाले लोगों, उनकी परंपराओं, संस्कृति और प्रकृति के साथ उनके संबंधों को भी करीब से समझ रहे हैं।

नैनीताल में हिमालयन इकोज का 11वां संस्करण आज से

नैनीताल के एबॉट्सफोर्ड एस्टेट में 30 और 31 अक्टूबर को हिमालयन इकोज का 11वां संस्करण आयोजित किया जा रहा है। साहित्य, कला और पर्यावरण पर केंद्रित इस उत्सव में भारत समेत छह देशों के प्रतिभागी हिस्सा ले रहे हैं। इस आयोजन में ‘वॉकिंग बाबा’ बेंजामिन वियात्ते की यात्रा भी आकर्षण का केंद्र रहेगी। इसके अलावा रूस के व्लादिमीर जैतसेव हिमालय के चित्रकारों पर चर्चा करेंगे। फ्रांसीसी कलाकार और खगोल वैज्ञानिक प्रियंका राजकाकती कवि सुदीप सेन के साथ संवाद करेंगी।

अमीश त्रिपाठी से लेकर पीपल बाबा तक होंगे शामिल

हिमालयन इकोज के इस संस्करण में साहित्य और पर्यावरण जगत की कई जानी-मानी हस्तियां शामिल होंगी। ‘शिव त्रयी’ के लेखक अमीश त्रिपाठी, बाल साहित्यकार पारो आनंद, खाद्य इतिहासकार रुशीना मुनशॉ घिल्डियाल और पर्यावरणविद् पीपल बाबा अपने विचार साझा करेंगे। वहीं, लेखिका मृदुला रमेश के ‘नेचर वे’ सत्र में प्रकृति और जलवायु से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होगी। आयोजन के विभिन्न सत्रों में हिमालय की कला, साहित्य, जैव विविधता और पर्यावरण संरक्षण जैसे विषयों को केंद्र में रखा जाएगा।

हिमालय की संस्कृति और पर्यावरण पर होगा संवाद

हिमालय अपनी बर्फीली चोटियों, नदियों, जंगलों और प्राकृतिक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है। लेकिन इसकी पहचान केवल पर्यटन तक सीमित नहीं है। यहां की जैव विविधता, पारंपरिक ज्ञान, स्थानीय संस्कृति और समुदायों की आजीविका भी महत्वपूर्ण है। जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक संसाधनों पर बढ़ता दबाव और पर्वतीय क्षेत्रों में हो रहे बदलावों के बीच पर्यावरण संरक्षण की जरूरत लगातार महसूस की जा रही है। हिमालयन इकोज के माध्यम से इन विषयों पर साहित्य, कला और पर्यावरण के नजरिए से चर्चा की जाएगी।

दूसरे दशक में वैश्विक संवाद बढ़ाने की पहल

आयोजक जाह्नवी प्रसाद के अनुसार, हिमालयन इकोज अपने दूसरे दशक में प्रवेश कर रहा है। इस बार दुनिया के अन्य पर्वतीय देशों की भागीदारी बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया है। भारत, नेपाल, भूटान, स्विट्जरलैंड, रूस और फ्रांस के प्रतिभागियों की मौजूदगी इसी प्रयास का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि पर्वतों को समझने के लिए केवल उन्हें दूर से देखना पर्याप्त नहीं है, बल्कि वहां की प्रकृति, संस्कृति और लोगों के जीवन से जुड़ना भी जरूरी है। 30 और 31 अक्टूबर को आयोजित यह उत्सव इसी संवाद और जुड़ाव को आगे बढ़ाने का प्रयास है।

कौन हैं ‘वॉकिंग बाबा’ यानी बेन बाबा?

स्विट्जरलैंड के रहने वाले बेंजामिन वियात्ते पेशे से वेब डिजाइनर हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उन्होंने अपनी पारंपरिक जीवनशैली से अलग आध्यात्म और योग की राह अपनाई। भगवा वस्त्र पहनने के कारण उन्हें ‘बेन बाबा’ और लगातार पैदल यात्रा करने के कारण ‘वॉकिंग बाबा’ कहा जाता है। बेंजामिन भारतीय संस्कृति, परंपरा और सभ्यता से काफी प्रभावित हैं। वह योग, ध्यान और भारतीय वेद-पुराणों को मूल्यवान मानते हैं। पैदल विश्व यात्रा को उन्होंने अपनी साधना का हिस्सा बनाया है। 18 देशों और करीब 14 हजार किलोमीटर का सफर तय कर भारतीय हिमालय तक पहुंचना उनकी इसी यात्रा का अहम पड़ाव है।