Uttarakhand News: दीपावली 2026 पर 30 साल बाद बन रहा खास ज्योतिषीय संयोग, जानें लक्ष्मी-गणेश पूजन का शुभ मुहूर्त

दीपावली 2026 पर धन लक्ष्मी और अनफा योग के संयोग की ज्योतिषीय मान्यता बताई जा रही है। आचार्य विकास जोशी के अनुसार, लक्ष्मी-गणेश पूजन का शुभ समय शाम 5:54 से रात 7:50 बजे तक रहेगा।
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Diwali 2026 Date: Diwali 2026 Lakshmi Puja Muhurat and Auspicious Yog
Image: Diwali 2026 Lakshmi Puja Muhurat and Auspicious Yog

देहरादून: दीपावली 2026: इस बार दीपावली का पर्व विशेष ज्योतिषीय संयोगों के बीच मनाया जाएगा। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, इस वर्ष दीपावली पर धन लक्ष्मी योग और अनफा योग का संयोग बन रहा है। बताया जा रहा है कि करीब 30 वर्षों बाद ये दोनों योग एक ही दिन बन रहे हैं। ऐसे में इस बार की दीपावली को लक्ष्मी पूजन, सुख-समृद्धि और व्यापारिक उन्नति की कामना के लिहाज से विशेष माना जा रहा है।

Diwali 2026: Lakshmi Puja Muhurat and Auspicious Yog

दीपावली हर साल कार्तिक मास की अमावस्या तिथि को मनाई जाती है। इस दिन अमावस्या तिथि के साथ प्रदोष काल का संयोग भी बन रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गृहस्थों, व्यापारियों और साधना करने वालों के लिए यह दिन विशेष महत्व रखता है। शास्त्रों में दीपावली पूजन के लिए प्रदोष काल, निशीथ काल और महानिशीथ काल का एक ही तिथि में होना शुभ माना गया है।
नारायण ज्योतिष संस्थान के आचार्य विकास जोशी के अनुसार, 8 नवंबर को शाम 5:31 बजे से रात 8:09 बजे तक प्रदोष काल रहेगा। इस दौरान वृषभ लग्न का संयोग भी बनेगा। लक्ष्मी-गणेश पूजन के लिए सबसे श्रेष्ठ मुहूर्त शाम 5:54 बजे से रात 7:50 बजे तक बताया गया है। इस प्रकार श्रद्धालुओं को पूजा के लिए कुल 1 घंटा 54 मिनट का समय मिलेगा।
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, प्रदोष काल में वृषभ जैसे स्थिर लग्न के दौरान मां लक्ष्मी और भगवान गणेश का पूजन करना विशेष फलदायी माना जाता है। मान्यता है कि इस समय विधि-विधान से पूजा करने पर घर में सुख-समृद्धि, शांति और धन-धान्य की वृद्धि होती है।

व्यापारियों के लिए कुंभ लग्न में पूजा का शुभ समय

दीपावली पर व्यापारी वर्ग अपने प्रतिष्ठानों, कार्यालयों और कारखानों में भी गणेश-लक्ष्मी पूजन करता है। इसके लिए कुंभ लग्न का समय दोपहर 1:27 बजे से 2:54 बजे तक बताया गया है। इस दौरान व्यापारी अपने बही-खातों, तिजोरी और प्रतिष्ठान में पूजा-अर्चना कर सकते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस पूजा के माध्यम से व्यापारी नए वित्तीय वर्ष में उन्नति और बरकत की कामना करते हैं।

निशीथ और महानिशीथ काल में साधना का विशेष महत्व

दीपावली की रात निशीथ काल और महानिशीथ काल का भी विशेष धार्मिक महत्व है। आचार्य के अनुसार, सिंह लग्न रात 12:25 बजे से 2:42 बजे तक रहेगा। इस समय को लक्ष्मी साधना और श्री यंत्र पूजन के लिए उपयुक्त माना जाता है। वहीं, मंत्र जाप और विशेष साधना के लिए महानिशीथ काल रात 11:39 बजे से देर रात 12:31 बजे तक रहेगा। इसके अलावा निशा पूजा, काली पूजा और विशेष तांत्रिक साधनाओं के लिए रात 1:37 बजे से 3:15 बजे तक का समय शुभ बताया गया है।

स्थिर लग्न में पूजन से बरकत की मान्यता

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, दीपावली पर स्थिर लग्न में मां महालक्ष्मी, भगवान गणेश और कुबेर देव का पूजन करना विशेष शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इससे घर में धन-धान्य, बरकत और सुख-समृद्धि बनी रहती है। इसी कारण दीपावली पर श्रद्धालु प्रदोष काल में दीप प्रज्वलित कर विधि-विधान से लक्ष्मी-गणेश की पूजा करते हैं और परिवार की खुशहाली की कामना करते हैं।

लक्ष्मी पूजन से लेकर काली पूजा तक का शुभ मुहूर्त

दीपावली पर प्रदोष काल शाम 5:31 बजे से रात 8:09 बजे तक रहेगा। लक्ष्मी-गणेश पूजन का श्रेष्ठ समय शाम 5:54 बजे से रात 7:50 बजे तक बताया गया है। व्यापारियों के लिए कुंभ लग्न दोपहर 1:27 बजे से 2:54 बजे तक रहेगा। वहीं, सिंह लग्न रात 12:25 बजे से 2:42 बजे तक, महानिशीथ काल रात 11:39 बजे से 12:31 बजे तक और निशा पूजा एवं काली पूजा का समय रात 1:37 बजे से 3:15 बजे तक बताया गया है।