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ऋषियों का मार्ग: केदार हिमालय के इन ट्रेक्स पर शोर नहीं, सिर्फ मंत्र सुनाई देते हैं
प्रकृति से जुड़ने और आत्मिक शांति पाने का अवसर। केदार हिमालय की वो यात्राएं जो ज़िंदगी भर याद रहती हैं।
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चम्पावत: वर्दी को पहनने वाले इंसान ही तो हैं..खाकी के पीछे भावनाएं ही हैं, इंसानियत ही है और नेकदिली ही है। आज हम आपको एक ऐसी ही कहानी से रू-ब-रू कराने की कोशिश कर रहे हैं, जो सच्ची है और समाज के लिए एक प्रेरणा है। आम तौर पर इंसान नौकरी करता है और अपने लिए कमाता खाता है। लेकिन क्या आपने कभी किसी और लिए जीकर देखा है? यकीन मानिए बड़ा सुकून मिवता है, जब आप एक गरीब घर के बच्चे के चेहरे पर मुस्कान ले आएं। वैसे भी शिक्षा की मुस्कान से बेहतर क्या होगा? उत्तराखंड के चंपावत जिले में उत्तराखंड पुलिस की महिला कांस्टेबल सविता तैनात हैं। पुलिस की व्यस्त ड्यूटी से जितना भी वक्त मिलता है, सविता उसे गरीब बच्चों को पढ़ाने में बिता देती हैं। अपने खर्चे पर सविता इन गरीब बच्चों को निशुल्क पढ़ा रही हैं।
Good Work CPT#मित्र_पुलिस_की_महिला_कांस्टेबल_की_पहल
#अपने_खर्च_पर_दे_रही_बच्चों_को_शिक्षा
उत्तराखंड के चम्पावत जिले में Uttarakhand Police की महिला कांस्टेबल #सविता_कोहली अपनी व्यस्त ड्यूटी से वक्त निकालकर अपने खर्च पर बच्चों को शिक्षा दे रही है। इतना ही नहीं स्कूल तक नहीं पहुंचने वाले बच्चों को वो निःशुल्क पढ़ा रही हैं।
आपको बता दें कि सीमांत बनबसा के नगर पंचायत परिसर के खुले आसमान के नीचे बच्चों को पढ़ा रही सविता कोहली बनबसा थाने में कांस्टेबल के पद पर तैनात हैं। सविता ने अपनी मेहनत और लगन से कूड़ा चुनने वाले इन बच्चों की तकदीर बदल दी है। अब इन बच्चों के हाथ में कूड़े की थैली की जगह कॉपी-किताबों ने ले ली है। सविता की यह मुहिम मिना बाजार में बसे झुग्गी झोपड़ी के बच्चों तक पहुंची, तो कारवां बढ़ता चला गया। अब 30 से ज्यादा बच्चे किताबी अक्षर ज्ञान से रूबरू हो रहे हैं। सविता कोहली की इस पहल की स्थानीय लोग भी प्रशंसा करते नहीं थक रहे हैं।
(News Courtesy News18)
Posted by Uttarakhand Police on Friday, October 26, 2018