कहते हैं कि जागरों में बड़ी ताकत होती है। गर्व की बात ये है कि प्रीतम भरतवाण ने इस परंपरा को जिंदा रखा है।
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आदिशा
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Image: Pritam bharatwan jagar
: प्रीतम भरतवाण...ये नाम आज के दौर में उत्तराखंड का बच्चा बच्चा जानता है। हर कोई जानता है कि उत्तराखंड की जागर कला को एक नया रूप और नया कलेवर देने में प्रीतम भरतवाण का ही हाथ रहा है। जानकार कहते हैं कि अगर प्रीतम भरतवाण नहीं होते, तो आज के युवा जागर की विधा को भूल चुके होते। आज प्रीतम भरतवाण अपनी जागरी के दम पर देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी लोकप्रिय हैं। आपको याद होगा कि हाल ही में अमेरिका के सिनसिनाटी के छात्रों और शोधकर्ताओं को प्रीतम भरतवाण ने ढोल और दमाऊं से भी परिचित करवाया था। जागर सम्राट कहे जाने वाले प्रीतम भरतवाण हाल ही में एक बेहतरीन जागर लेकर आए थे। सिर्फ दो महीने के भीरत ही इस जागर को यू-ट्यूब पर करीब 9 लाख लोग देख चुके हैं।
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पहाड़ की इस परंपरा को जिंदा रखे हुए प्रीतम भरतवाण के इस गीत में जागर की पूरी झलक दिखती है। इस जागर को खुद प्रीतम भरतवाण ने लिखा है। संजय कुमोला का संगीत, अरविंद नेगी का डायरेक्शन, नागेंद्र प्रसाद की एडिटिंग और पवन गुंसाई की रिकॉर्डिंग शानदार है। प्रीतम उत्तराखंड के सुपरहिट लोकगायकों में से एक हैं। जागर को अंतर्राष्ट्रीय पहचान देने वाले प्रीतम के बारे में कहा जाता है कि, वो जब भी कोई गाना लिखते हैं, तो उसमें रच जाते हैं, उसमें रम जाते हैं। सच कहें तो प्रीतम की इस जुगलबंदी का कोई सानी नहीं है। ये ही वजह है कि उत्तराखंड के गायकों में से वो सबसे ज्यादा अलग खड़े होते हैं। ये प्रीतम के ही शब्दों का जादू है कि , इस गाने को कहीं भी टूटने नहीं दिया। यकीन मानिए आप इस जागर को एक बार सुनेंगे तो बार बार सुनते जाएंगे।