पहाड़ के लोकगीतों को समझना और उन्हें अपनी आवाज़ में जनता के बीच प्रस्तुत करना बड़ा काम है। अच्छी बात ये है कि बॉलीवुड गायक भी इस बात को समझते हैं।
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रश्मि पुनेठा
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Trails once used by sages, locals, and shepherds. Ideal for travelers seeking silence over social media fame.
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Image: papon singing uttarakhandi folk song
: कौन कहता है कि पहाड़ के लोकगीतों में ताकत नहीं ? एक सच्चा गायक और कलाकार वो ही है जो इन लोकगीतों का पारखी होस लोकसंगीत की समझ रखता हो। आज हम आपको बॉलीवुड के ऐसे सिंगर का वीडियो दिखा रहे हैं, जिसे वास्तव में लोकगीतों की परख है। सही मायनों में कहें तो देश के अलग अलग राज्यों के लोकगीतों को समझकर, उनके भाव जानकर ही इस गायक ने बॉलीवुड में कदम रखा और अपने हिसाब से अपनी ज़िंदगी जी रहा है। नाम है पेपोन। पेपोन यूं तो आसाम से हैं और बॉलीवुड में कई हिट गीत दे चुके हैं लेकिन उससे पहले वो कई सुपरहिट लोकगीत लोगों के सामने पेश कर चुके हैं। नॉर्थ ईस्ट फेस्टिवल में पेपोन को बुलाया गया तो वहां उन्होंने हजारों की भीड़ को उत्तराखंड का लोकगीत सुनाया।
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पेपोन ने कहा कि ‘’मैं कुमाऊं जाता हूं, उत्तराखंड चल जाता हूं...मैं अकेला बैग लेता हूं और भागता हू चुपके से। जब आप अकेले किसी यात्रा पर जाते हैं, तो आप दुनिया को ज्यादा समझ सकते हैं। मैंने कुमाऊं से शुरू किया और लोकगीतों को सीखने की कोशिश की। ये गीत एक लड़की पर आधारित है, जो पहाड़ की ही है। वो अपने पिता से कह रही है कि पिताजी मेरी शादी तराई में मत कराओं, मुझे वहां नहीं जाना...मैं यहीं खुश हूं।’’ इसके बाद पेपोन पहाड़ का लोकगीत ‘झन दीया बोज्यू, छाना बिलौरी, लगता बिलौरी का घाम’ गीत गाने लगते हैं। आप भी देखिए।