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केदार हिमालय के ऐसे ट्रेक जहां रास्ता खुद आपको चुनता है
बुग्याल, हिमालयी वन और बर्फीली चोटियों का अद्भुत नज़ारा। आध्यात्म, रोमांच और एकांत का अनोखा संगम।
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: शिव ही संसार का आदि और अंत है। देवभूमि को शिव का निवास माना जाता है। यहां शिव के कई धाम हैं, इन्हीं में से एक धाम है चमोली जिले के नंदप्रयाग में बसा बैरास कुंड महादेव जहां भगवान शिव का मंदिर है। कहा जाता है कि यहीं रावण ने अपने दस सिर काटकर अपने आराध्य भगवान शिव को समर्पित किए थे। इस इलाके को पहले दशमौलि के नाम से जाना जाता था जो कि बाद में दशौली के रूप में मशहूर हुआ। रावण ने शिव को प्रसन्न करने के लिए बैराश कुंड महादेव मंदिर में तपस्या की थी, जिसका उल्लेख केदारखंड और रावण संहिता में भी मिलता है। बैरास कुंड महादेव मंदिर उत्तराखंड के सबसे पुराने मंदिरों में से एक माना जाता है। इस जगह का इतिहास त्रेता युग से जुड़ा बताया जाता है। मान्यता है कि त्रेता युग में लंकापति रावण ने भगवान भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए यहीं पर तपस्या की थी।