रुद्रप्रयाग के दो जांबाज...जान की बाजी लगाकर नदी के बीच से निकाला शव

नदी के बीचों बीच का नजारा देखकर हर कोई दंग था, इस बीच पहाड़ के ही दो युवाओं ने गजब का साहस दिखाया।
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पहाड़, मंत्र और देवभूमि का आशीर्वाद.. त्रियुगीनारायण में शादी सिर्फ एक समारोह नहीं, आध्यात्मिक अनुभव है।

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उत्तराखंड: Story of dharmendra jagwan and baag singh jagwan of rudraprayag
Image: Story of dharmendra jagwan and baag singh jagwan of rudraprayag

रुद्रप्रयाग: मंगलवार को केदारनाथ राजमार्ग के नौला पानी के समीप मंदाकिनी नदी के बीचों-बीच एक व्यक्ति के शव के फंसे होने की सूचना मिली। इस बीच बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों की मौके पर भीड़ जुट गई। सूचना के बाद कुछ देर में पुलिस भी मौके पर पहुंच गई। आपदा प्रबंधन विभाग को सूचना के बावजूद कोई भी कर्मचारी घटना स्थल पर नहीं पहुंचा। हर कोई तमाशबीन बनकर नदी के बीच में फंसे शव को देख रहा था। इस बीच भीड़ में से दो युवकों धमेन्द्र जगवाण और बाग सिंह जगवाण ने दिलेरी दिखाते हुए नदी के बीच में जाने का फैसला लिया। दोनों युवकों ने जान जोखिम में डालकर नदी में फंसे शव को किसी तरह रस्सी से बांधा। इस दौरान थोड़ी सी भी चूक होने पर दोनों युवकों की जान पर बन आ सकती थी। लेकिन दोनों युवकों ने साहस का परिचय देते हुए शव को नदी से बाहर निकालने में बड़ी भूमिका निभाई। इस दौरान पुलिस की मदद से शव को स्ट्रेचर में बांधकर सड़क पर लाया गया।

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शव के नदी किनारे पहुंचने पर पुलिस ने जवानों ने उसे बाहर निकालने में अहम योगदान दिया। अपने रिस्क पर नदी में उतरे भटवाड़ी सैंण निवासी धमेन्द्र जगवाण और छतोली, तिलवाड़ा निवासी बाग सिंह जगवाण का कहना है कि उन्होंने मानवता के नाते ये सब किया है। हालांकि हमने आपदा प्रबंधन की ट्रैनिंग नहीं ली है, लेकिन उस समय हमें यही सूझा कि किसी तरह डेड बाॅडी को बाहर निकालना है। इसलिए हमने बिना कुछ सोचे नदी में जाने का फैसला लिया। जन अधिकार मंच के अध्यक्ष मोहित डिमरी ने जिला प्रशासन से दोनों युवकों की इस दिलेरी पर उन्हें पुरस्कृत करने की मांग की है। दोनों युवकों ने अपनी जान की बाजी लगाकर डेड बाॅडी को बाहर निकालने में बड़ा योगदान दिया। ऐसे युवाओं को प्रोत्साहित किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि जिले का आपदा प्रबंधन अभी आईसीयू में है। मौके पर आपदा प्रबंधन का कोई भी सदस्य नहीं दिखाई दिया। एक छोटी सी घटना होने पर आपदा प्रबंधन की स्थिति यह है, बड़ी घटना होने पर विभाग से कोई उम्मीद ही नहीं की जा सकती।