उत्तराखंड में चार जवानों की खुदकुशी, एक साथ हुए थे पुलिस में भर्ती

पुलिस महकमे के चार जवानों की खुदकुशी एक पहेली बन गई है। इनमें से तीन फांसी लगाकर जान दे चुके थे, जबकि चौथे ने शुक्रवार को खुद को गोली मार ली।
Advertisement Best Hidden Treks in Kedar Himalaya for True Mountain Lovers

A chance to reconnect with nature and inner peace. Treks in Kedar Himalaya that stay with you for a lifetime.

Example Ads Media
उत्तराखंड: four jawan suicide in uttarakhand
Image: four jawan suicide in uttarakhand

देहरादून: वो चारों एक साथ ही पुलिस महकमे में भर्ती हुए थे। चारों के परिवार अपने नौनिहालों की इस सफलता पर खुश थे, लेकिन अचानक खुशियों को ग्रहण लग गया। पुलिस के इन चारों जवानों ने एक-एक कर खुदकुशी कर ली। इनमें से 3 जवानों ने फांसी लगा ली तो वहीं चौथे ने शुक्रवार को खुद को गोली मार कर अपनी जिंदगी खत्म कर ली। अब ये चारों तो इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन वो अपने पीछे ढेरों सवाल छोड़ गए हैं। इन चारों जवानों की मौत का रहस्य पुलिस के लिए एक पहेली बन गया है। हैरान करने वाली बात ये है कि इन चारों में से किसी ने भी सुसाइड नोट नहीं छोड़ा था। ऐसे में हर कोई यही सवाल कर रहा है कि आखिर ऐसा क्या हुआ, जो इन चार दोस्तों ने अपनी जान दे दी...मौत का रास्ता चुन लिया। उत्तराखंड पुलिस के चारों जवान विपिन सिंह भंडारी, जगदीश सिंह, हरीश और चंद्रवीर सिंह साल 2012 बैच के थे। पुलिस ट्रेनिंग के वक्त से ही इनकी दोस्ती के चर्चे खूब हुआ करते थे, लेकिन एक-एक कर चारों इस दुनिया को अलविदा कह गए। पुलिस मुख्यालय ने सिपाहियों की मौत के कारणों की जांच कराने के आदेश दिए हैं।

यह भी पढें - उत्तराखंड: जहरीली शराब पीने से 48 घंटे के भीतर 34 लोगों की मौत, 33 लोगों की हालत गंभीर
शुक्रवार को विजिलेंस मुख्यालय में सिपाही चंद्रवीर सिंह ने खुद को गोली मार ली थी। चंद्रवीर अपने दोस्तों की मौत से दुखी थे। बताया जा रहा है कि सबसे पहले सिपाही विपिन सिंह भंडारी डिप्रेशन का शिकार हुए। हरिद्वार में क्यूआरटी में तैनाती के दौरान उन्होंने फांसी लगा ली थी। भंडारी की मौत की वजह अब तक सामने भी नहीं आई थी कि तभी दूसरे साथी हरीश ने भी फांसी लगा ली। तीसरे साथी जगदीश बिष्ट ने भी सिडकुल में फांसी लगा ली थी। शुक्रवार को चंद्रवीर ने भी खुदकुशी कर ली। इनकी खुदकुशी एक राज बनकर रह गई है। बताया जा रहा है कि जगदीश बिष्ट की मौत के बाद सिपाही चंद्रवीर की दिमागी हालत ठीक नहीं थी। 18 जनवरी को चंद्रवीर सिंह का ट्रांसफर हरिद्वार से देहरादून कर दिया गया। 5 दिन पहले ही उसे विजिलेंस मुख्यालय की ड्यूटी पर भेजा गया था, जहां उसने खुद को गोली मार ली। चार जवानों की मौत से खुद पुलिस महकमा उलझन में है। महज डेढ़ साल के भीतर चारों दोस्त दुनिया छोड़ कर चले गए। चारों की खुदकुशी की वजह अब तक एक राज बनी हुई है। पुलिस अधिकारियों ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं।