पौड़ी गढ़वाल में दो बेटियों की मौत के बाद पसरा मातम, माता-पिता का रो-रोकर बुरा हाल

पौड़ी गढ़वाल में नदी में डूबी छात्राओं का शव मिलने के बाद उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया। दोनों बच्चियों की मौत से गांव वाले स्तब्ध हैं तो वहीं परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
Advertisement Secret Himalayan Treks Near Kedarnath You’ve Never Heard Of

Trails once used by sages, locals, and shepherds. Ideal for travelers seeking silence over social media fame.

Example Ads Media
उत्तराखंड: two girls died in pauri garhwal
Image: two girls died in pauri garhwal

पौड़ी गढ़वाल: घर का वो आंगन सूना हो गया, जिसमें वो दोनों बच्चियां खेला करती थीं...उनकी हंसी से घर जगमगा उठता था। माता-पिता खुद को कोस रहे हैं कि अगर 8 फरवरी के मनहूस दिन उनकी बच्चियों ने स्कूल जाने की जिद ना की होती, तो शायद वो आज जिंदा होतीं। काश उन्होंने दोनों को स्कूल जाने से रोक लिया होता। पौड़ी गढ़वाल के बीरोंखाल में छात्राओं की मौत से हर कोई स्तब्ध था। पोस्टमार्टम के बाद अमीषा का अंतिम संस्कार किया जा रहा था, कि उसी वक्त छात्रा नेहा की लाश भी पुलिस ने बरामद कर ली। गमगीन माहौल में दोनों बच्चियों का अंतिम संस्कार किया गया। परिजन बिलख रहे थे, उन्हें इस हालत में देख गांव वालों की आंख भी नम हो गईं। बता दें कि 8 फरवरी को बीरोंखाल के बापता गांव में रहने वाली 14 साल की अमीषा और 11 साल की नेहा स्कूल जाते वक्त नदी में डूब गईं थीं।

यह भी पढें - उत्तराखंड में चार जवानों की खुदकुशी, एक साथ हुए थे पुलिस में भर्ती
इसके बाद तो मानों हड़कंप ही मच गया। पहले अमीषा का शव पुलिस ने बरामद कर लिया था, लेकिन क्योंकि उसके पिता दिनेश रावत विदेश में काम करते हैं, इसलिए उसका अंतिम संस्कार नहीं हो पाया था। पिता के गांव पहुंचने के बाद अमीषा का अंतिम संस्कार किया गया। दूसरी बच्ची नेहा की तलाश जारी थी और परिवार की थोड़ी सी उम्मीदें बची थीं लेकिन इस बीच नेहा की डेड बॉडी भी पुलिस ने खोज ली और परिवार पर मानों मातम का पहाड़ टूट पड़ा। पोस्टमार्टम के बाद उसका भी अंतिम संस्कार कर दिया गया। अमीषा और नेहा के घरवालों को अनहोनी का अहसास हो गया था। 8 फरवरी को घरवालों ने दोनों को स्कूल जाने से मना किया था, लेकिन वो नहीं मानीं। जल्दी स्कूल पहुंचने की कोशिश में वो मुख्य पुल से स्कूल ना जाकर बल्लियों के पुल के सहारे नदी पार करने लगीं।

यह भी पढें - उत्तराखंड: जहरीली शराब पीने से 48 घंटे के भीतर 34 लोगों की मौत, 33 लोगों की हालत गंभीर
इसी दौरान दोनों का संतुलन बिगड़ा और वो गहरी नदी में जा गिरीं। इसके बाद तो हाहाकार मच गया। ऐसा नहीं है कि बच्चियों को बचाने की तुरंत कोशिश नहीं की गई...प्राथमिक स्कूल में कार्यरत टीचर शिवदर्शन सिंह तैराकी ना जानने के बावजूद दोनों बच्चियों को बचाने के लिए नदी में कूद गए, लेकिन अफसोस कि उन्हें बचाया नहीं जा सका। अमीषा का शव एक घंटे बाद घटनास्थल से 150 किलोमीटर दूर मिला। बाद में नेहा की लाश भी बरामद हो गई। हादसे के बाद गांव में गम का माहौल है, गांववालों को भरोसा नहीं हो रहा कि जो बच्चियां कल तक पूरे गांव में चहकती घूमा करती थीं, वो अब इस दुनिया में नहीं रहीं। गांव वाले परिजनों को भी ढांढस बंधा रहे हैं, जिनकी दुनिया अब उजड़ चुकी है। बच्चियों की माताओं का रो-रोकर बुरा हाल है।